सिद्ध भगवान को अर्घ्य चढ़ाकर मंगल कामना की
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सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के तीसरे दिन पार्श्वनाथ उपवन में अभिषेक पूजन आदि कार्यक्रम किया गया। इस दौरान पंडित सनत कुमार और विनोद कुमार जैन की मौजूदगी में विश्व शांति हवन कराया गया।
नगर के करहल रोड स्थित पार्श्वनाथ उपवन मंदिर में सौधर्म इंद्र, कुबेर इंद्र, सनत कुमार, महेंद्र इंद्र, ईशान इंद्र को अभिषेक, पूजन एवं वृहह शांति धारा की गई। शांति धारा करने का सौभाग्य साक्ष्य जैन, विशाल जैन, विरात को मिला। सिद्धयंत्र की शांतिधारा का सौभाग्य अक्षय, शुभम जैन को मिला। प्रतिष्ठाचार्य ने श्रावकों को कर्तव्यों के बारे में बताने के साथ ही भजन आदि के साथ पूजन कराया। इंद्र-इंद्राणियों ने महामंडल पर जाकर सिद्ध भगवान को अर्घ्य-अर्पण किया। तीसरे दिन सिद्ध चक्र विधान में 32 अर्घ्य चढ़ाए गए। पूर्व संध्या पर आयोजित भरतपुर से आई संगीत पार्टी ने भगवान पार्श्वनाथ की आरती की। आरती का उमेश चंद्र जैन और परिवारीजनों ने की। इसके पश्चात प्रख्यात विद्वान शिवचरन लाल जैन ने प्रवचन देते हुए सिद्धचक्र विधान एवं सिद्ध भगवान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बिना साधक बने मनुष्य सिद्ध नहीं बन सकता। सिद्ध चक्र के आठ चक्रों के बारे में समझाया। स्तुति जैन और रिचा जैन ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इस अवसर पर विजय जैन, शांतिशरण जैन, सुरेश जैन, प्रवीन जैन, सुनील जैन, शशांक जैन, मनोज जैन, अजव जैन, राकेश जैन, विजयकांत जैन मौजूद थे।