हजरत इमाम हुसैन की शहादत के चालीस दिन बाद चेहल्लुम पर उठने वाले ताजिये देर रात गमगीन माहौल में करबला ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए। इससे पहले अखाड़ों में युवकों ने तलवारबाजी का प्रदर्शन कर हैरतअंगेज कारनामे किए।
सोमवार की शाम करीब चार बजे शहर के विभिन्न मोहल्लों से ताजिये गश्त करते हुए बड़े चौराहे पर पहुंचे। यहां ताजियों के साथ आए अखाडे़ के नौजवानों ने तलवार, चाकू, लाठी-डंडों आदि से हैरतअंगेज प्रदर्शन किए। इसके बाद ताजियादारों को पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। सभी ताजिये जुलूस के रूप में कृष्णा सिनेमा रोड, देवी रोड, मदार दरवाजा होते हुए करबला पहुंचे। कई स्थानों पर बर्तन, फल, बिस्कुट आदि की लुट्टस की गई। करबला में मरसिए पढ़े गए और फिर मातमी माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
करहल
करहल में चेहल्लुम पर नगर में ताजियों का जुलूस निकाला गया। इसमें शहीदाने करबला की याद में मातमी धुनें बजाई गई। इस दौरान घरों में कुरआनख्वानी और जगह जगह मजलिस हुईं। ताजिया कमेटी की ओर से नगर में चेहल्लुम के ताजियों को जुलूस रात को निकाला गया।
कुरावली
कुरावली में चेहल्लुम का त्योहार परंपरागत रूप से मनाया गया। युवाओं ने अखाड़े का आयोजन कर करतब दिखाए गए। ताजिये तकिए वाली मस्जिद से मोहल्ला सराय, मोहल्ला कौआटोला, मोहल्ला महाजनान, सदर बाजार, जैन मंदिर वाली गली होते हुए देर रात करबला पहुंचे। यहां पर गमगीन माहौल में ताजियों को दफना दिया। इस मौके पर पूर्व चेयरमैन हाजी डा. मुन्ने खां, सदर शान मोहम्मद, डा. अंसार, डा. जीलानी, पूर्व सभासद मो. अजमेरी, आजम खान, अब्दुल सलाम, शान अंसारी, शमशाद, साकिर कुरैशी, वसीम राईन, अरमान फारूखी, बाबू अद्दा, असद खामोश, जाविद, रिजवान, आबिद, मुकीम, शाहिद हुसैन, फरीद, आदि शामिल रहे।
घिरोर
घिरोर में भी सोमवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। इस मौके पर आफाक नियाजी, असलम, चेयमैन गफ्फार, आढ़ती गफ्फार कुरैशी, अलीदराज नियाजी, हाजी मुन्ने खां, मुन्ने खां फारुखी सहित काफी संख्या में लोग शामिल हुए।