आशीष धूसिया
मैनपुरी। बदलते समय में केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल भी रोजगार की सबसे बड़ी कुंजी बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत चल रही विभिन्न प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से अब तक करीब 625 युवाओं के सपनों को नई उड़ान मिली है। कंप्यूटर, मेडिकल, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटी पार्लर, ग्रीन जॉब्स और अन्य रोजगारपरक ट्रेडों का प्रशिक्षण लेकर युवा नौकरी पाने के साथ अपना स्वरोजगार भी स्थापित कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी पारंपरिक रोजगार की बजाय कौशल आधारित कॅरिअर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड और प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से युवाओं को आधुनिक रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत जिले की पहचान तारकशी कला में भी युवाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य एवं मिशन के जिला समन्वयक नागेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 625 युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया। वहीं, वर्ष 2026-27 में 900 युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कई युवा प्रतिष्ठित कंपनियों, सरकारी और निजी अस्पतालों में कार्यरत हैं, जबकि अनेक युवाओं ने स्वयं का रोजगार शुरू कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है।
कंप्यूटर और ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण के लिए उत्साह
जिला कौशल प्रबंधक अभिषेक चौरसिया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में कंप्यूटर प्रशिक्षण के प्रति सबसे अधिक उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रबंधक फिरोज खान ने बताया कि बालिकाओं में ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण की विशेष रुचि है। हाल ही में भोगांव के जगतपुर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में बालिकाओं ने भाग लेकर रोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।
कौशल विकास मिशन के तहत मेडिकल ट्रेड में प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मेरा प्लेसमेंट उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में हो गया। पहले रोजगार की चिंता थी लेकिन प्रशिक्षण ने मुझे आत्मविश्वास दिया। -आयुष यादव, गांव नगला ऊदी
प्रशिक्षकों ने व्यावहारिक तरीके से जनरल ड्यूटी असिस्टेंट का प्रशिक्षण दिया। इससे काम सीखना आसान हो गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें नौकरी मिल गई। यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण मिले तो गांव का युवा भी बेहतर भविष्य बना सकता है। - रितिक गुप्ता, करहल
परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। कौशल विकास मिशन की जानकारी मिलने पर प्रशिक्षण लिया। आज करहल के एक निजी अस्पताल में उन्हें नौकरी मिल गई। अगर यह प्रशिक्षण नहीं मिलता तो शायद रोजगार पाना मुश्किल होता। - अनुज कुमार, गांव किरथुआ
सीएम युवा उद्यमी विकास के तहत पांच लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर दोना-पत्तल निर्माण इकाई शुरू की। कारोबार सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इससे स्वरोजगार का अवसर मिला और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया। - प्रियंका, मोहल्ला सौतियाना
फोटो 11 फैक्ट्री में दोना-पत्तल बनवातीं प्रियंका। संवाद
फोटो 11 फैक्ट्री में दोना-पत्तल बनवातीं प्रियंका। संवाद
फोटो 11 फैक्ट्री में दोना-पत्तल बनवातीं प्रियंका। संवाद
फोटो 11 फैक्ट्री में दोना-पत्तल बनवातीं प्रियंका। संवाद