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Mainpuri News: किरथुआ खेड़ा में होगा उत्खनन....खोजे जाएंगे गुप्त और मौर्यकालीन अवशेष

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मैनपुरी। करहल के किरथुआ में कुषाण काल के अवशेष मिलने के बाद पुरातत्व विभाग को यहां मौर्य और गुप्तकालीन अवशेषों की खोज के लिए फिर से उत्खनन कराने की तैयारी कर रहा है। बारिश समाप्त होते ही यहां पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए टीम का निर्धारण कर लिया गया है।
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जुलाई, 2025 में करहल के किरथुआ खेड़ा में 15 से 20 फीट ऊंचे और 10 हेक्टेयर में फैले टीले पर क्षेत्रीय ग्रामीण खुदाई कर रहे थे। इस दौरान ग्रामीणों को कुछ प्राचीन अवशेष दिखाई दिए। इनमें ईंट, बर्तन, मूर्तियों के टुकड़े, खिलौने समेत 50 तरह की वस्तुएं थीं। गांव के रहने वाले रवीश ने इसकी जानकारी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृति विभाग को दी, जिसके बाद इतिहास विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर बीडी शुक्ला अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीले का सर्वे किया गया। उन्हें इस सर्वे में महाभारत कालीन से जुड़े हुए कई अवशेष प्राप्त हुए, जिसमें कच्ची और पक्की ईंटों की दीवार, मृदभांड, कोठार, खिलौने, मूर्तियां और हड्डी के टुकड़े शामिल थे।
टीम ने सभी अवशेष को एएसआई के विदिशा रिसर्च सेंटर भेजा, जिसकी जांच में जानकारी मिली कि यह सभी अवशेष हड़प्पा काल, प्रथम शताब्दी, कुषाण काल आदि के हैं। इसके बाद एएसआई के साथ विश्वविद्यालय ने एमओयू के बाद शोधकार्य शुरू किया। राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से इस स्थान को सुरक्षित करने के लिए मार्च, 2026 में जिलाधिकारी से पत्राचार किया गया और जमीन के जरूरी दस्तावेज मांगे गए। इन दस्तावेजों को उपलब्ध करा दिया गया है। ऐसे में संभावना है कि बारिश बंद होने के बाद अक्तूबर से यहां पर संरक्षण का कार्य शुरू हो जाएगा।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर बीडी शुक्ला ने बताया कि सभी स्वीकृति मिल चुकी हैं। बारिश की वजह से काम रुका हुआ है। अक्तूबर से काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यहां पर पहले ही कुषाण काल और महाभारत काल के अवशेष मिल चुके हैं। ऐसे में अब संभावना है कि यहां पर खुदाई करने पर मौर्य काल और गुप्त काल के अवशेष भी मिल सकते हैं। अगर अनुमान सही होता है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। खुदाई में मिली कच्ची और पक्की ईंटों की दीवार टीले पर पश्चिम की ओर जा रही है, उस स्थान की भी खुदाई की जानी है। इसके लिए की प्लानिंग कर ली गई है। एएसआई के अनुसार जो भी खुदाई की जाएगी, वह एक-एक फीट के अनुसार होगी। पश्चिम की तरफ जो हिस्सा जा रहा है, उस दीवार की तरफ भी खुदाई की जाएगी। इस कार्य के लिए करीब 15 से 20 लोगों की टीम तैयार कर ली गई है, जिसमें आठ रिसर्च स्कॉलर, एएसआई के करीब 4 से 5 कर्मचारी और अधिकारी व इतिहास विभाग से संबंधित लोग शामिल रहेंगे।
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