कस्बा में 25 वर्ष पूर्व गल्ला मंडी स्थापित हुई। किसान खुश थे कि अब उन्हें माल बेचने के लिए बाहर नहीं जाना होगा, लेकिन अराजक तत्वों के भय से मंडी में माल की खरीद बिक्री का काम शुरू नहीं हो सका है। यहां आवंटित दुकानों से प्रत्येक तीन साल में किराया लिया जाता है, लेकिन व्यापार के नाम पर यहां कुछ भी नहीं होता। आढ़ती और व्यापारी बाउंड्रीवाल ने होने से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
आढ़ती और व्यापारियों पर अराजक तत्वों का भय इस कदर हावी है कि आढ़ती यहां दुकान खोलने से डरते हैं। कुछ साल पहले मंडी में दुकानों के बाहर पडे़ टीन शेड अराजक तत्वों ने तोड़ दिए। जिसके बाद वर्ष 2012 में नए टीन शेड भी डलवाए गए। 10 दुकानों का निर्माण कराया गया। उक्त सभी दुकानों की वर्ष 2013 में एसडीएम मैनपुरी की देखरेख में बोली लगवाई गई। आवंटन किया गया, लेकिन व्यापार के नाम पर यहां अभी तक सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां आढ़ती अराजक तत्वों के भय से दुकानें नहीं खोलते इसके चलते किसान अन्य मंडियों में अपना माल बेचते हैं। आढ़ती रफीक अली बताया कि कई बार अधिकारियों से मंडी में बाउंड्रीवाल और गेट बनवाए जाने की मांग की गई, लेकिन तमाम आश्वासनों के बाद अभी तक कार्य नहीं कराया गया।
विजयपाल सिंह ने बताया कि मंडी परिषद वाले हर वर्ष दुकानों का किराया व लाइसेंस रिन्यूवल के नाम पर पैसा लेते रहते हैं मगर जब मंडी की बाउंड्री व गेट बनवाने के लिए लिखित व मौखिक ज्ञापन देते हैं तो उस पर कोई करवाई नहीं की जाती। जिसके चलते मंडी बंद पड़ी हुई है। इसके चलते बुढरा, बालमपुर, रंपुरा, अचलपुर, मधुपुरी, अंतपुर, चीतई, देवपुरा, उसनीधा, जाख, नगला कंचन, विक्रमपुर, नगला सलेही के किसान अन्य मंडियों में माल बेचने को मजबूर हो रहे हैं।