फोटो 17 तहसील किशनी में शिकायतें सुनते डीएम अंजनी कुमार सिंह। संवाद
मैनपुरी। भले ही समय के साथ लोगों की सोच बदली हो। खानपान का तरीका बदल गया हो लेकिन एक ऐसी चीज आज भी है जिसकी मांग जिले की प्रत्येक दावत में रहती है। वह है मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी। इसका स्वाद ही ऐसा है कि लोग दावत के निमंत्रण से पहले इस बात की जानकारी लेते हैं कि क्या मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी बनी है। जिले के प्रमुख व्यंजनों की बात करें तो भले ही युवाओं को फास्ट फूड पसंद आता हो। लेकिन इसके बाद भी शादी समारोह हो या फिर कोई और कार्यक्रम मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी के बिना दावत अधूरी ही रहती है। गांव में तो ये व्यंजन लगभग हर कार्यक्रम में तैयार होता ही है। शहर की बात करें तो रहीसी दावतों में भी मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी मांग रहती है। महंगे मैरिज होम में भी लोग इसे तैयार कराते हैं। खास बात यह है कि शहर के पुराने लोग तो कोई दावत को निमंत्रण देता है तो पूछते हैं कि क्या मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी की व्यवस्था भी है।
गांव से बुलाए जाते हैं हलवाई :
शादी समारोह में मिठाइयां बनाने वाले हलवाई तो बहुत मिल जाते हैं लेकिन उलदा की पूड़ी और मठ्ठे के आलू बनाने के लिए आज भी गांव के हलवाई की ही जरूरत होती है। विशेष निवेदन पर गांव से हलवाई मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी तैयार करने के लिए बुलाए जाते हैं।
अलग से तैयार करनी होती है भट्टी :
मठ्ठे के आलू और उलदा की पूड़ी गैस की भठ्ठी पर तैयार नहीं किए जाते हैं। इसके लिए या तो जमीन में भट्टी खोदी जाती है या फिर ईटों से अलग से बड़ी भट्टी तैयार की जाती है। भोजन पकाने के लिए इसमें कोयला या गैस नहीं लकड़ी जलाई जाती है।
फोटो 17 तहसील किशनी में शिकायतें सुनते डीएम अंजनी कुमार सिंह। संवाद