पावर ग्रिड कार्पोरेशन पहली बार अपनी निर्माणाधीन बलिया-भिवाड़ी ग्रिड लाइन का निरीक्षण ड्रोन (अनमेंड एरियल व्हीकल) में लगे एचडी कैमरे के माध्यम से करेगा। इससे जहां अंतिम निरीक्षण के दौरान समय की काफी बचत होगी। वहीं छोटी से छोटी कमियों पर भी विशेषज्ञ बारीक नजर रख सकेंगे। साथ ही कमियां मिलने पर उन्हें सही करने के दौरान भी कंट्रोल रूम में बैठकर निर्देश दे सकेंगे। यही नहीं लाइन बनने के बाद पेट्रोलिंग के दौरान भी इसका उपयोग किया जाएगा।
पावर ग्रिड कार्पोरेशन वर्तमान में बलिया से लेकर भिवाड़ी तक कुल 810 किमी लंबी ग्रिड लाइन का निर्माण कर रहा है। यह लाइन नेशनल ग्रिड बनाने की प्रक्रिया का एक भाग है। इस लाइन के निर्माण के दौरान बनने वाले बड़े-बडे़ टावरों के निरीक्षण के लिए इस बार पावर ग्रिड कार्पोरेशन ने ड्रोन का प्रयोग करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ड्रोन में एचडी कैमरे लगाकर टावर के जोड़ और लाइनों के कनेक्शन को देखा जाएगा। यदि कोई कमी रह जाएगी तो इंजीनियर नीचे ही स्क्रीन पर देखकर कर्मचारियों को वॉकीटाकी या फोन से निर्देश देते रहेंगे। इससे पूरी लाइन के निरीक्षण में समय की काफी बचत होगी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में लाइन का निर्माण होने के बाद टावर और लाइन को जोड़ की चेकिंग मैनुअल रूप से कर्मचारी करते थे। इससे टावर पर उतरने चढ़ने और चेकिंग में काफी समय बर्बाद होता था। अब यदि कहीं पर कोई जोड़ सही नहीं है तो ड्रोन में लगा कैमरे में देखकर उसे सही करा दिया जाएगा। यदि किसी टावर में कमी नहीं है तो उसका भी पता ड्रोन में लगे कैमरे से चल जाएगा।
12 शहरों से होकर गुजर रही लाइन
बलिया भिवाड़ी लाइन यूपी के बलिया, मऊ, उन्नाव, कन्नौज, मैनपुरी, एटा, हाथरस, अलीगढ़ और हरियाणा के नूंह, मेवात व भिवाड़ी से होकर गुजर रही है। इसके अलावा दिल्ली के भी कुछ क्षेत्र से लाइन गुजर रही है। इस दौरान विभिन्न शहरों में लाइन को पूरी करने के लिए 200 टावर लगाए गए हैं।
लाइन पूरी होने के बाद भी होगा ड्रोन का प्रयोग
लाइन पूरी होने के बाद इसे चालू किया जाएगा। उसके बाद भी इसकी नियमित पेट्रोलिंग के लिए भी ड्रोन का प्रयोग किया जाएगा। यदि लाइन के जोड़ कहीं ढीले होंगे तो ड्रोन में लगे कैमरे से वह स्थान लाल रंग का दिखेगा। इस पर तत्काल उक्त स्थानों के ज्वाइंट सही करा दिए जाएंगे।
बलिया भिवाड़ी लाइन की पेट्रोलिंग के लिए पावर कार्पोरेशन ने ड्रोन का प्रयोग करने का निर्णय लिया है। इसके लिए संबंधित जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। यूपी में अभी सिर्फ कन्नौज से एनओसी नहीं मिली है। वहां से एनओसी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
एसपी सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर पावर ग्रिड कार्पोरेशन