नगर में बुधवार की रात हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से रात भर श्रोताओं का मनोरंजन किया।
बुधवार की रात गणेश उत्सव के अवसर पर मंच पर सदर बाजार में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें प्रसिद्ध कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत कवियों ने गणेश व सरस्वती की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजकों ने कवियों का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया। कवि निर्मल सक्सेना ने ‘श्री गणपति गजानन जी हमें कुछ ज्ञान तो दे दो, अतुलनीय दान के ठाकुर कोई वरदान तो दे दो’ गणेश वंदना सुनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। कवयित्री रुबिया खान ने ‘मेरे वतन को इस तरह बदनाम ना करो, घोटालों की छुरियों से कत्लेआम ना करो।’ सुनाकर श्रोताओं में देशभक्ति का संदेश दिया। हास्य कवि लटूरी सिंह लट्ठ न ‘प्रेम रोग में घिर कर चचा हद से ज्यादा वीक हो गए, इज्जत इतनी घटी कसम से पीकदान की पीक हो गए।’ सुनाकर सबको लोटपोट कर दिया। गीतकार बलराम श्रीवास्तव ने ‘प्यार करो तो पूरे मन से आधे मन से कभी न करना, एक साथ दो नौकाओं में अपने पैर कभी मत रखना।’ कवि समीर शुक्ला ने ‘अरे मोरे भइया बचके रहना, गिरगिट दिल्ली है सतरंगा टिनिक टिनिक हर गंगा।’ सुनाया। सतीश मधुप ने ‘केसरिया पावक सा पावन अग्नि नहीं फुंकने देना, हरा रंग हरियाली वाला चक्त्रस् नहीं रुकने देना।’ कवि सम्मेलन में आयोजक शिवकुमार गुप्ता, चेयरमैन जैसीराम यादव, पंकज यादव, सुरेंद्र वर्मा, रमेश गुप्ता, प्रबल चौहान, श्रवण कुमार सक्सेना, हरीकृष्ण चक, हरदत्त दुबे, दीपेंद्र चौहान, उमाकांत यादव, प्रदीप गुप्ता, राजू गुप्ता, होरीलाल बाथम सहित सेकड़ों श्रोता रात भर मौजूद रहे। कार्यक्त्रस्म का संचालन सतीश मधुप ने अध्यक्षता गणेश भगवान ने की।