लक्ष्य के अनुरूप वसूली न होने पर डीएम ने सभी तहसीलदारों का वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा तहसीलदारों का मुख्य कार्य राजस्व वसूली कराना है, लेकिन तहसीलदारों ने अपने मुख्य कार्य से मुंह मोड़ लिया है। यदि राजस्व अधिकारी ही वसूली में रुचि नहीं लेंगे तो राजस्व कहां से आएगा। तहसीलदारों को यह भी नहीं मालूम कि किस मद में कितनी डिमांड है और कितनी वसूली हो चुकी है। वे अमीनों की वसूली की समीक्षा भी नहीं कर रहे हैं।
जिलाधिकारी लोकेश एम ने शनिवार देर शाम तहसीलों के मुख्य कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान कार्य में सुधार न होने तक सभी तहसीलदारों का वेतन रोकने के आदेश दिए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कि जब तक तहसीलों का कार्य नहीं सुधरेगा वेतन नहीं मिलेगा। उन्होंने तहसीलदारों से राजस्व संहिता पढ़ने और अपने कर्तव्यों व दायित्वों की जानकारी लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि तहसीलदार का पद बहुत महत्वपूर्ण है। इनका मुख्य कार्य तहसील क्षेत्र की जमीन का रिकॉर्ड रखना और अधिकाधिक राजस्व वसूली कराना है, लेकिन अफसोस, राजस्व वसूली में जनपद का बुरा हाल है। मंडल में जनपद सबसे पिछड़ा है। अन्य तीनों जनपद इस जनपद से आगे हैं। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि 15 दिन में स्थिति में सुधार न होने दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी तहसीलदारों और अमीनों से एक-एक कर वसूली की प्रगति और लंबित आरसी की जानकारी ली। वह उस वक्त हतप्रभ रह गए जब वाणिज्य कर की आरसी में काफी अंतर पाया। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने सीआरए को आदेशित किया कि वह एसीआरए के साथ सभी तहसीलों में आरसी का मिलान कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करें और दोषी के विरुद्ध कार्रवाई करें।
उन्होंने तहसीलदारों को 10 बड़े बकायादारों पर प्रभावी कार्रवाई कर वसूली कराने और वसूली की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी सूर्यमणि लाल चन्द्र,समस्त तहसीलदार आदि उपस्थित रहे।