जनपद रेल सुविधाओं के नाम पर शून्य ही है। यहां के लोगों को दिल्ली और कानपुर जाने के लिए एक मात्र कालिंदी एक्सप्रेस मिली भी लेकिन वह यात्रियों और व्यापारियों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। रविवार को एक दिन के लिए आनंद विहार एक्सप्रेस भी नियमित न होने से यात्रियों को राहत नहीं पहुंचा पा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैनपुरी को कम से कम पांच ट्रेन बजट में मिलें। वहीं आगरा के लिए ट्रेन का संचालन हो। इटावा रेल लाइन शुरू की जाए। ट्रैक पर डीजल से चलने वाली ट्रेन के स्थान पर बिजली से चलने की व्यवस्था भी की जाए।
नगर के पंजाबी कालोनी निवासी चिकित्सक डाक्टर एके जौहरी कहते हैं कि रेल बजट में ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिससे मैनपुरी सीधा महानगरों से जुड़ जाए। इसके लिए मैनपुरी-इटावा रेलवे लाइन का कार्य पूर्ण कर इस पर ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाए। शिकोहाबाद-फर्रुखाबाद रेल लाइन पर कानपुर, लखनऊ और आगरा के लिए ट्रेन चलाने की बजट में व्यवस्था की जाए।
स्थानीय निवासी राकेश शाक्य ने कहा कि तीन दशक पूर्व चलने वाली फर्रुखाबाद-आगरा पैसेंजर को पुन: शुरू किया जाना चाहिए। आगामी रेल बजट में आगरा के अलावा कानपुर, लखनऊ के लिए कम से कम पांच अन्य ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था की जानी चाहिए। मनोज यादव का कहना था कि रेल बजट में मैनपुरी क्षेत्र के साथ वर्षों से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। रेल बजट में आगरा के लिए ट्रेन की व्यवस्था होनी चाहिए। पीयूष चतुर्वेदी का कहना है कि रेल बजट में आनंद विहार एक्सप्रेस को साप्ताहिक की जगह नियमित किया जाए। सोनू ठाकुर का कहना है कि फर्रुखाबाद-शिकोहाबाद रेलवे लाइन पर भी डीजल इंजन की जगह बिजली से ट्रेन के चलने की व्यवस्था की जाए।
रेल बजट में जिले के लोगों को मानव रहित रेलवे क्रासिंग से निजात मिलने की उम्मीद है। सालों से मानव रहित रेलवे क्रासिंग से गुजर रहे लोग सरकार के रेल बजट पर आस लगाए बैठे हैं। लोगों का मानना है कि हादसे टालने के लिए सरकार शायद इस बार रेल बजट में मानव रहित रेलवे क्रासिंग के लिए कुछ बजट निर्धारित करेगी।
शिकोहाबाद से फर्रुखाबाद तक अभी 36 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं। इसमें जिले में अभी कारूखेड़ा, विधूना, कोसमा, जवापुर, चिरैयापुर, कोंढर, रठेरा, लालपुर सथिनी, बैजनाथपुर, ब्योंति खुर्द, सिवाई, सिनौरा, सूरजपुर की रेलवे क्रासिंग मानव रहित हैं। इन रेलवे क्रासिंग पर अधोगामी पुल बनाए जाने की लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले रेल बजट में जिले के लोगों को मानव रहित रेलवे क्रासिंग से निजात मिलने की उम्मीद लगी हुई है।