डग्गामार वाहन ही बनेंगे बहनों का सहारा
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इस बार भी रक्षाबंधन पर बहनें परेशानी हाेंगी। कई मार्गों पर यात्रा करने के लिए डग्गामार वाहन ही एकमात्र सहारा हैं। कई रूट पर रोडवेज की बसों का संचालन ही नहीं होता है।
रक्षाबंधन पर हालांकि रोडवेज ने बसों के फेरे बढ़ाए हैं। फिर भी अधिकांश मार्गों पर केवल डग्गामार वाहन ही सहारा हैं। जिले में मैनपुरी डिपो के पास 47 तथा बेवर डिपो के पास 39 बसों का बेड़ा है। दोनों डिपो की अधिकांश बसें दिल्ली रूट पर ही संचालित हैं। रक्षाबंधन पर इसके चलते बहनों को एक बार फिर परेशानी होगी। रक्षाबंधन पर डग्गामार वाहन संचालक भीड़ को देखते हुए किराया बढ़ा देते हैं। बहनों को हर सा
ल की तरह परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
इन मार्गों पर होगी परेशानी
मैनपुरी- किशनी
मैनपुरी-कुसमरा
मैनपुरी-औंछा
मैनपुरी-अलीगंज
मैनपुरी-जसराना
मैनपुरी-कुर्रा
मैनपुरी-बरनाहल
मैनपुरी-बिछवां
भाई का भविष्य संवारने को त्याग दी सारी खुशियां
इकलौते भाई की खुशी के लिए खुद की खुशी कुर्बान करने वाली रेखा कौशल आज अपने भाई के लिए आदर्श बन चुकी हैं। मां-बाप की मौत के बाद भाई का भविष्य बेहतर बनाने के लिए उन्होंने शादी न करने का संकल्प तक लिया। भाई की बेहतर नौकरी से उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
रामबाग में रहने वाली रेखा कौशल जय मां इंस्टीट्यूट में निदेशक एवं सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। उनके पिता जगन्नाथ प्रसाद मिठाई की दुकान करते थे। मां राम मूर्ति घरेलू महिला थीं। वर्ष 1996 में जब पिता की मौत हुई तो उनका छोटा भाई दीपक कुमार 11 साल का था। उस समय उनकी उम्र लगभग 26 साल की रही होगी। उस समय वह कपिल मुनि डिग्री कालेज में प्राचार्या थीं। भाई का भविष्य बेहतर बने इसके लिए शादी न करने का निर्णय लिया। उनकी सोच थी कि शादी करने के बाद भाई की परवरिश सही तरीके से नहीं कर पाएंगे। उन्होंने अपने भाई को पढ़ाया। एमए, बीएड शिक्षित दीपक एनडीएनसी इंटर कालेज दिल्ली में हिंदी के प्रशिक्षक पद पर तैनात हैं। दीपक भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए रक्षाबंधन घर आना नहीं भूलते। रोजाना फोन पर अपनी बहन का हाल-चाल पूछना उनकी कार्यशैली बन गई है। रेखा का कहना है कि भाई की खुशी में ही उनकी खुशी है। उन्होंने भाई की खुशी के लिए खुद शादी नहीं की।