किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अपर जिला जज (चतुर्थ) की कोर्ट ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने में से आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी।
थाना दन्नाहार के एक गांव की रहने वाली किशोरी एक मई 2016 की शाम चार बजे गांव के बाहर खेत में शौच के लिए गई थी। वहां पहले से मौजूद गांव के सर्वेश उर्फ गंगाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने तथा रिपोर्ट लिखाने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी। दुष्कर्म करने के बाद सर्वेश भाग गया। किशोरी ने घर पहुंचकर मां से शिकायत की। उसने आरोपी के खिलाफ देर शाम रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बाद किशोरी का मेडिकल कराया।
पुलिस ने विवेचना कर सर्वेश के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मामले की सुनवाई अपर जिला जज चतुर्थ प्रदीप कुमार की कोर्ट में की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों ने घटना का समर्थन करते हुए कोर्ट में गवाही दी। अपर जिला जज ने सर्वेश को किशोरी से दुष्कर्म करने का दोषी पाया। सहायक शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने आरोपी के अपराध को देखते हुए कड़ी सजा देने की दलील दी। अपर जिला जज ने सर्वेश को 10 साल तथा 40 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने में से 20 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।
जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा
मैनपुरी (ब्यूरो)। घटना के दो दिन बाद ही पुलिस ने सर्वेश को जेल भेज दिया। उसकी किसी भी कोर्ट से जमानत मंजूर नहीं हुई। उसने जेल में रहकर ही पूरा मुकदमा लड़ा। बुधवार को भी वह मुकदमे का निर्णय सुनने के लिए जेल से आया था। उसको सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है।
सात माह में ही हो गई सुनवाई
मैनपुरी (ब्यूरो)। किशोरी से एक मई 2016 को हुए दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने 21 जुलाई 2016 को चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। आरोपी के जेल में होने के कारण मुकदमे की जल्द सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष से वादी, पीड़िता, विवेचक, चिकित्सक, रिपोर्ट लिखने वाले सिपाही की ही गवाही हुई। गवाही के आधार पर सात माह में ही मुकदमे की सुनवाई कर आरोपी को सजा सुना दी गई।