थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव गोशलपुर में आठ साल पहले एक दलित परिवार ने परिवार के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। इसकी भनक किसी को नहीं लग पाई। दो दिन पहले उसके धर्मपरिवर्तन करने का हल्ला मचा, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने समझाकर उसकी हिंदू धर्म में घर वापसी कराने का प्रयास किया, लेकिन उसने साफ इंकार कर दिया। ग्रामीणों की सूचना पर एलआईयू की टीम व पुलिस भी पहुंच गई और पूरे मामले की जानकारी ली।
गांव गोशलपुर में संतोष बाबू, पत्नी उमा देवी और पांच बच्चों के साथ रहता है। उसके तीन लड़कियां शिल्पी, जूली और चंचल है, जबकि पुत्र आशीष और दीपक है। संतोष राजमिस्त्री है। संतोष ने बताया कि लगभग दस साल पहले उसकी पत्नी उमा देवी को कैंसर हो गया था। किसी झाड़ फूंक वाले ने बताया कि दिल्ली में निजामुद्दीन औलिया की मजार पर चादर चढ़ाओ तो आराम मिलेगा। इसके बाद उसने और उसकी पत्नी ने वहां जाकर चादर चढ़ाई। इसके कुछ समय बाद उसकी बीमारी सही हो गई। संतोष ने बताया कि लगभग आठ साल पहले उसने पूरे परिवार के साथ इस्लाम ग्रहण कर लिया था। इसके बाद से वह हिंदू धर्म के पर्व और त्योहार उनका परिवार अब नहीं मनाता है।
उसने अपनी बड़ी बेटी शिल्पी की शादी भी लखनऊ में रहने वाले जुबैर खान से कर दी थी। उसने बताया कि वह अन्य बच्चों की भी शादी वह मुस्लिमों उन्हीं के तौर तरीकों से करेगा।
समझा रहे हैं लेकिन मान नहीं रहा
मैनपुरी। संतोष के बड़े भाई और पूर्व प्रधान किशन लाल ने बताया उन्हें अभी तक यह भनक नहीं थी कि उनके छोटे भाई ने इस्लाम धर्म अपना लिया है। बेटी की शादी भी उन्होंने गांव से बाहर जाकर की थी। इसलिए शादी के बारे में भी जानकारी नहीं हो सकी। अब उसे समझा रहे हैं लेकिन वह नहीं मान रहा है।
ग्रामीणों नहीं सहमत, आक्रोश
मैनपुरी। पूरे गांव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं है। संतोष के इस्लाम अपनाने के बाद वह गांव का एकमात्र मुस्लिम परिवार हो गया है। गांव के जय ओम प्रकाश मिश्रा, ओमबाबू दीक्षित व राकेश कठेरिया का कहना है कि इस प्रकार धर्म परिवर्तन करना गलत है। इस प्रकार का कदम उठाने से पहले संतोष को सोच विचार करना चाहिए था।