कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम में प्रवचन का आयोजन हुआ। इसमें महंत अमर साहेब ने कहा कि हमारा अंत:करण एक ऐसी अदृश्य संस्कारों की पोथी होते हैं जिसमें हमारे बिना चाहे भी सारे शुभ अशुभ संस्कारों का संग्रह होता है। उसी के अनुसार हमारे जीवन में सुख, दुख, शुभ, अशुभ, अनुकूलता, प्रतिकूलता के थपेड़े पड़ते रहते हैं।
महंत अमर साहेब ने कहा कि अंत:करण में विकारों की आग धधक रही हो और बाहर से रटे हुए ज्ञान का पानी डाल रहे हो तो विकार उसी प्रकार शांत नहीं होंगे। जैसे शरीर के दर्द में केवल दर्द की दवा का नाम रटने से क्या होगा। जिस प्रकार कोई पतिव्रता नारी अपने पति के अलावा किसी भी पुरुष का सपने में भी चिंतन नहीं करती। उसी प्रकार जब हमारे मन में सत्य जागृत हो जाता है तो अपनी आत्म परमात्मा शक्ति को छोड़कर किसी भी कल्पित मान्यताओं को सपने में भी महत्व नहीं देता। साथ ही किसी असत्य प्राणी पदार्थ सांसारिक वासनाओं के चाल में फंसती है। इसलिए जब ऐसा निर्मल मन होगा तो अपने आपकी जानकारी अपने आप की स्थिति स्वयं हो जाएगी। यही हमारी सच्ची आराधना होगी। इस मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई थी।