मैनपुरी। आम बजट ने किसी को खुश तो किसी को निराश किया है। आयकर सीमा और स्लैब में कोई बदलाव न किए जाने और सेवा कर 12.36 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत किए जाने से मध्यम वर्ग को निराशा ही हाथ लगी है। महिलाओं का कहना है कि बजट में आम जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में कमी किए जाने का प्राविधान नहीं किया गया है। छोटी इकाइयों के लिए मुद्रा कोष की स्थापना, अल्पसंख्यक युवाआें के रोजगार के लिए नई मंजिल योजना, किसानों को साढ़े आठ लाख करोड़ का ऋण दिए जाने का स्वागत भी किया गया है।
शनिवार को आम बजट पर सभी की निगाहें टिकी हुईं थीं। जैसे ही वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सदन में बजट पेश करना शुरू किया तो लोग टीवी सेट के आगे जम गए। बजट में आयकर सीमा न बढ़ाए जाने से वेतनभोगी कर्मचारी असंतुष्ट नजर आए। वहीं सर्विस टेक्स बढ़ाए जाने से अधिकांश लोग कहते नजर आए कि वित्तमंत्री ने महंगाई पर अंकुश लगाने का नहीं महंगाई को और बढ़ाने का काम किया है। सर्विस टेक्स का असर गरीबों पर भी पड़ेगा। किसानों को 8.50 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिए जाने की किसानों ने सराहना की है। छोटी इकाइयों की स्थापना के लिए मुद्राकोष बनाने और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए नई मंजिल योजना का भी स्वागत किया जा रहा है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए अटल पेंशन और 12 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर दो लाख के प्रधानमंत्री दुर्घटना बीमा योजना को भी सराहा जा रहा है।
आम बजट निराशाजनक और महंगाई को बढ़ाने वाला है। वित्तमंत्री ने सेवा कर बढ़ाकर महंगाई को नजर अंदाज किया है। महंगाई के दौर में तीन लाख तक की आमदनी को कर से मुक्त किया जाना चाहिए था। मध्यम वर्ग के परिवारों को इससे झटका लगा है।
अनिल पांडेय, राज्यकर्मी
बजट में आम लोगों के लिए कोई रियायत नहीं दी गई है। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया का नारा भी बजट में साकार होता नजर नहीं आता। व्यापारियों और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कोई खास रियायत की घोषणा नहीं की गई है। टेक्स के सरलीकरण की दिशा में कुछ नहीं किए जाने से व्यापार जगत को निराशा ही हाथ लगी है।
मुकेश जैन, व्यापारी
बजट में किसी वर्ग की महिलाओं को कोई लाभ नहीं दिया गया है। महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए भी कोई खास प्राविधान नहीं किए गए हैं। बजट से उम्मीद थी कि किचन के खर्चों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी की जाएगी लेकिन पेश किए गए बजट से कमी के स्थान पर बढ़ोत्तरी ही होगी।
वंदना सिंह, गृहणी
बजट में बिजली-पानी और कृषि उत्पादन लागतों पर भी कुछ छूट के प्रबंध किए जाते तो अच्छा रहता। बजट में किसानों को ऋण देने के लिए भारी भरकम धनराशि की व्यवस्था तो की गई है लेकिन घाटे से जूझ रहे किसानों को ब्याज में राहत देने की बात नहीं की गई है। सब्सिडी जारी रखने की बात कहकर वित्तमंत्री ने किसानों को कुछ राहत दी है।
रामबहादुर सिंह, किसान
आम बजट में अल्पसंख्यक युवकोें को रोजगार देने के लिए नई मंजिल योजना का स्वागत है। योजना के तहत अल्पसंख्यक युवाओं को कैसे रोजगार के अवसर मिलेंगे इसकी जानकारी हो तो पता चले कि योजना कितनी कारगर साबित होगी।
एजाज उर्फ गुड्डू
वित्तमंत्री ने बजट में ऐसा कुछ नहीं दिया है जिससे देश के आम लोगों को राहत मिलती। सेवा कर बढ़ाकर आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने का काम किया गया है। आयकर सीमा में भी कोई छूट नहीं दी गई है।
खुमान सिंह वर्मा, जिलाध्यक्ष, सपा
आम बजट से मध्यम वर्ग के परिवारों को निराशा ही हाथ लगी है। सेवा कर बढ़ाने से जहां महंगाई बढ़ेगी वहीं आयकर की सीमा न बढ़ाए जाने से वेतनभोगी कर्मचारियों को मुश्किलों से जूझना पड़ेगा। महंगाई में वेतनभोगी के लिए निवेश कर पाना आसान नहीं होगा।
दीपक पेंटर, जिलाध्यक्ष बसपा
चुनाव पूर्व दिखाए गए सपनों से कई उम्मीदें पाले लोगों को वित्तमंत्री ने निराश किया है। बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे गरीबी दूर हो और रोजगार के अवसर बढ़ें। काले धन की वापसी को लेकर भी बजट में कुछ नहीं कहा गया है। लोगों को अब और महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
संकोच गौड़, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
वित्तमंत्री ने संतुलित और देश का आधरभूत ढांचा मजबूत करने वाला बजट पेश किया है। सब्सिडी जारी रहने से सभी को राहत मिलेगी। किसानों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए बजट में कई राहत देने वाले प्रावधान हैं। डाकघरों में बैंकिंग शुरू किए जाने का लाभ ग्रामीणों को मिलेगा।
आलोक गुप्ता, जिलाध्यक्ष, भाजपा
वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था की आर्थिक विकास दर को तीव्रता प्रदान करने के लिए निवेश आधारित रूप प्रदान किया है। बजट वेतनभोगी और मध्यम वर्ग के लिए निराशाजनक है। सेवा कर की दर में वृद्धि होने से महंगाई बढ़ेगी। बजट में निर्धनता एवं बेरोजगारी को कम करने की दिशा में कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है। कृषि के लिए किसी विशेष योजना का प्रस्ताव भी नहीं है। आयकर छूट की सीमा नहीं बढ़ने और आयकर की दरों में कोई परिवर्तन नहीं होने से वेतनभोगी आयकरदाता को मायूसी हुई है। आयकर दाता को आयकर में छूट तभी प्राप्त होगी जब करदाता कुछ निश्चित मदों जैसे पेंशन फंड, स्वास्थ्य बीमा, गृह ऋण ब्याज आदि में निवेश करेगा। निर्धन वर्ग के लिए 12 रुपये के प्रीमियम पर दो लाख रुपये का बीमा, अटल पेंशन योजना और जीवन ज्योति बीमा योजना एक अच्छी शुरुआत है। बड़ी कंपनियों के संदर्भ में निगम कर की दर को आगामी चार वर्ष में 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का अच्छा प्रस्ताव है। संपत्ति कर की समाप्ति और इसके स्थान पर एक करोड़ से अधिक आय पर दो प्रतिशत सर चार्ज लगने से राजकोष में वृद्धि होगी।
डाक्टर सुधीर सक्सेना, अर्थशास्त्री