नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के बहुजन समाज पार्टी से इस्तीफा देने से पार्टी को जिले में बड़ा झटका लगा है। खासकर भोगांव विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को काफी नुकसान होगा। क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य यहां से सपा मुखिया के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं। संघमित्रा मौर्य का कहना है कि उनके पिता ने समर्थकों की अनुमति लेकर ही यह कदम उठाया है। उनका, उनके पिता और समर्थकों का बसपा सुप्रीमो के निर्णय से दम घुटने लगा था। अब राहत महसूस हो रही है।
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बुधवार को स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने से जिले के बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है। उनके हाल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिलाध्यक्ष एसपीएस राणा को छोड़ कई ने तो फोन तक नहीं उठाया। बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य ने जिले से 2014 में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा था। तब वह तीसरे नंबर पर रही थीं। भोगांव विधानसभा क्षेत्र में शाक्य वोट ज्यादा हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने से पार्टी को काफी नुकसान हो सकता है। हालांकि पार्टी के पदाधिकारी इस संबंध में कुछ और ही बोल रहे हैं। जिलाध्यक्ष एसपीएस राणा का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहतीं। यही कारण है कि लोकसभा चुनावों के बाद से ही स्वामी प्रसाद मौर्य उनकी हिट लिस्ट में शामिल हो गए थे। तभी से उन पर नजर रखी जा रही थी। यदि वह पार्टी नहीं छोड़ते तो विधानसभा चुनावों से पहले ही उन्हें निकाल दिया जाता।
वहीं मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य से जब फोन पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि पार्टी में मायावती के एक तरफा निर्णयों से उनका, उनके पिता का और समर्थकों का दम घुटने लगा था। पिछले काफी समय से उनके पिता बसपा सुप्रीमो को समझाने की कोशिश कर रहे थे। जब हर ओर से निराशा हाथ लगी तब जाकर यह कदम उठाया। उन्होंने कहा कि उनके निर्णय से समर्थकों में काफी खुशी है। वे किस पार्टी में शामिल होंगी यह पूछने पर उनका कहना था कि अभी तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।