विधायक बनने की ख्वाहिश पाले मैदान में उतरे बहुत से नेताजी तो अपनी जमानत तक बजा सके। चार विधानसभा सीटों पर ताल ठोक रहे 43 प्रत्याशियों मेें से 34 की तो जमानत जब्त हो गई। महज नौ प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचाने में कामयाब हुए। इनमें कई तो ऐसे भी हैं जो किसी ने किसी पार्टी से जुड़े हुए हैं। जिले की चार सीटों में से बसपा के तीन प्रत्याशियों की भी जमानत जब्त हो गई।
चुनाव आयोग के नियमानुसार यदि किसी प्रत्याशियों को कुल मतदान के छठवें हिस्से के भी वोट नहीं मिलते तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है। आमतौर पर निर्दलीय प्रत्याशियों के अलावा कुछ छोटे दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त होती है। जिले में चारों विधानसभाओं में कुल 43 प्रत्याशी खड़े हुए थे। इनमें से मैनपुरी में 12 में, भोगांव में 10, किशनी में 11 और करहल में 10 में से आठ की जमानत जब्त हो गई। मतगणना के बाद इन 43 प्रत्याशियों में से कुल 34 प्रत्याशियों की जमानत ही जब्त हो गई। इनमें भोगांव, किशनी और करहल में तो कई पार्टियों के प्रत्याशियों की भी जमानत जब्त हो गई। परिणाम आने के बाद ऐसे प्रत्याशी और पार्टियों के पदाधिकारियों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था। अब उक्त पार्टियों के पदाधिकारी अब इस उधेड़बुन में हैं कि आखिर कहां कमी रह गई जो मतदाताओं ने उन्हें इतनी बुरी तरह नकार दिया।
इनकी हुई जमानत जब्त
किशनी से बसपा प्रत्याशी कमलेश कुमारी, भोगांव से बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह और करहल सीट से दलवीर सिंह अपनी जमानत नहीं बचा पाए। करहल से रालोद प्रत्याशी कौशल यादव, जन अधिकार मंच के किशनी से सुमन दिवाकर और मैनपुरी सीट से जन अधिकार मंच के प्रत्याशी विनय वर्मा की जमानत जब्त हो गई।
किस सीट से कितनों की हुई जमानत जब्त
मैनपुरी 9
भोगांव 8
किशनी 9
करहल 8