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चूड़ियां सरहदों पर सैनिकों के साथ लड़ती हैं...

Fri, 18 Nov 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
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चूड़ियां सरहदों पर सैनिकों के साथ लड़ती हैं... - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश संस्थान लखनऊ, आरसी महिला डिग्री कालेज के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कालेज सभागार में काव्यगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका विषय बाजारवाद के परिप्रेक्ष्य में अंतर्राष्ट्रीय पटल पर हिंदी रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मनीष शुल्क निदेशक और उदय प्रताप सिंह अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
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संगोष्ठी की संयोजिका डा. मधु गुप्ता ने कहा कि वैश्वीकरण ने हिंदी को बाजार तो दिया है लेकिन मीडिया के विकास के कारण हिंदी एक बाजारू भाषा बन गई है। उदय प्रताप सिंह अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ ने कहा कि बाजारवाद के कारण वैश्विक परिदृश्य में हिंदी का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल है।
मुख्य अतिथि मनीष शुक्ल ने कहा कि हिंदी बोलना, लिखना, पढ़ना सम्मान और गर्व की बात है। सचिव बलवीर सिंह चौहान ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य में भारत एक शक्तिशाली बाजार के रूप में उभरा है और हिंदी भाषा बाजार की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में सामने आई है।
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काव्य ऋषि सोम ठाकुर ने कहा कि कतरे से समुंदर तक, गुमनाम सिलसिला हूं, तोड़े हजार बंधन हर कैद से लड़ा हूं। यशपाल यश फीरोजाबाद ने ’चूड़ियां सरहदों पर सैनिकों के साथ लड़ती हैं... सुनाया। नरेंद्र यादव ने नौजवानों एवं युवाओं को उत्साहित किया। समापन प्राचार्या डा. शैफाली यादव ने अतिथियों और कवियों का आभार प्रकट कर किया। संयुक्त सचिव डा. सुशीला त्यागी, प्रो. केसी वशिष्ठ (दयालवाग),प्रो. वेद प्रकाश त्रिपाठी आगरा, डा. महेश आलोक, डा. मंजू शर्मा भारती, डा. अमिता दुबे, डा. कुसुम यादव ने भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डा. अलका पाठक ने किया। इस मौके पर डा. कीर्ति जैन, डा. अनीता सिंह, सविता, डा. शिवानी जैन, डा. विभा जैन, गौरी मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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