अजोम कुंड में रविवार को हजारों मछलियां मर गईं। इससे पहले भी इस कुंड में मछलियां मरी थी। इसमें पानी का जलस्तर कम होता जा रहा है। लेकिन इसकी दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने आक्रोश जताया।
कस्बा औंछा में बने ऐतिहासिक च्यवन ऋषि मंदिर के पीछे बना 62 बीघा का अजोम कुंड अपनी पवित्रता के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। कई साल पहले इस कुंड में काई, मेंढक नहीं मिलते थे। मान्यता है कि इसी कुंड में महर्षि च्यवन ऋषि ने देवताओं के वैद्य अश्वनी कुमार ने च्यवनप्राश का निर्माण किया था जिसे खाने से हजारों वर्ष के बुजुर्ग जवान हो गए थे। मगर हाल में कुछ सालों से इस कुंड की अनदेखी की गई, इसमें कमल की बेल फैलने से जहां विदेशी पक्षियों का आना कम हो गया वहीं कुंड की खोदाई न होने से जलस्तर कम हो गया। तो पानी के गर्म होने से सैकड़ों मछलियों का मरना शुरू हो गया है। आक्रोशित ग्रामीण प्रेमपाल, हंसाराम, पिंकी कठेरिया, सुनील, जंग बहादुर, मनोज, राज, निहाल सिंह, रामप्रकाश, सोनी कठेरिया, वकील आदि ने डीएम से जांच कराने की मांग की है। बताते चलें कि सन 2010 में कुंड में जलस्तर कम होने से मछलियां मर गई थीं। शिकायत मिलने पर पीएम कार्यालय से मछलियों के मरने का कारण पूछा था।