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अव्यवस्थाओं पर भड़के बंदी, पेशी पर जाने से इंकार

Wed, 03 May 2017 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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अदालत में पेशी पर जाते बंदी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला जेल में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए बंदियों ने पेशी पर जाने से इंकार कर दिया। जब प्रशासन को सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। जेल में सीओ सिटी और इंस्पेक्टर कोतवाली पहुंचे। वहां बंदियों को समझाकर दीवानी भेजा। इसके बाद बंदी दीवानी तो पहुंचे लेकिन एक बार फिर अदालत जाने से मना कर दिया। इसके चलते मौके पर मौजूद अधिकारियों के पसीने छूट गए। काफी मशक्कत के बाद बंदी अदालत में पेश हुए।  
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 बुधवार सुबह जेल से बंदियों ने दीवानी में पेशी पर जाने से इंकार कर दिया। बंदी रक्षकों ने समझाने का प्रयास किया। जब बंदी नहीं माने तो उन्होंने इसकी जानकारी जेलर को दी। जेलर बीएस मुकुंद जेल के अंदर पहुंचे। समझाने के बाद भी बंदियों ने उनकी बात भी नहीं मानी। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को हुई तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सीओ सिटी राजेश चौधरी, कोतवाली प्रभारी लक्ष्मण सिंह के साथ जेल पहुंचे। उन्होंने बंदियों से पेशी पर नहीं जाने के बारे में जानकारी ली।

बंदियों ने आरोप लगाया जेल में कुछ बंदियों को सभी सुविधाएं दी जाती हैं। जेल में एक बंदी रक्षक अघोषित तौर पर कैंटीन चला रहा है। बंदियों को यहीं से सामान खरीदने को मजबूर किया जाता है। कैंटीन पर प्रिंट रेट से बहुत अधिक कीमत पर सामान बेचा जाता है। शिकायत करने पर उनका उत्पीड़न किया जाता है। बंदियों से मिलाई के लिए आने वाले परिवारीजनों तथा रिश्तेदारों से वसूली की जाती है। सीओ और कोतवाली प्रभारी ने बंदियों को समझा बुझाकर पेशी पर जाने को राजी किया। इसके चलते बंदी एक घंटा देरी से दीवानी के लिए रवाना हुए। दीवानी पहुंचकर एक बार फिर बंदियों ने पेशी पर जाने से मना किया तो वहां भी सीओ सिटी और कोतवाली प्रभारी पहुंचे। उनके समझाने और जेलर से बात करने के साथ ही एसपी को मामले की जानकारी देने पर ही बंदी पेशी पर गए।
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पहले भी हंगामा करते रहे हैं बंदी
जिला जेल और दीवानी हवालात में अव्यवस्थाओं के चलते पहले भी कई बार बंदी हंगामा कर चुके हैं। हर बार उन्हें व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का आश्वासन दिया जाता है। कुछ दिन तो सबकुछ सही रहता है लेकिन उसके बाद फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है। ऐसे में कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं।


जेल में नियमावली का पालन कराया जा रहा है। बंदियों की मनमानी पर अंकुश लगाया है। मनमानी समाप्त होने के कारण बंदी झूठे आरोप लगा रहे हैं। जेल में कैंटीन चलवाने का आरोप निराधार है।
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-  बीएस मुकुंद, प्रभारी जेल अधीक्षक
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