नौनिहालों को मध्याह्न भोजन में शुद्ध दूध मिले। इसके लिए स्कूलों में अब भैंस पाली जाएगी। इसके चारा-पानी का इंतजाम ग्रामसभा को करना होगा। वहीं भैंस का दूध निकालने की जिम्मेदारी शिक्षक की होगी। इसके लिए उन्हें पशुपालन विभाग प्रशिक्षित भी करेगा।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्राथमिक शिक्षा के स्तर में सुधार के साथ ही बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पहल की गई है। इसके लिए शिक्षा तथा पशुधन विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई योजना को अमली जामा पहनाने की कोशिश शुरू हो गई है। इसके तहत बच्चों को एमडीएम में शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के लिए स्कूल में भैंस पाले जाने का निर्णय लिया गया है। 50 बच्चों पर एक भैंस पाली जाएगी। भैंस दुहने के लिए एक शिक्षक को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी पशुधन विकास विभाग की होगी। शासन ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर योजना के संदर्भ में सुझाव मांगे हैं।
शिक्षण कार्य होगा प्रभावित
मैनपुरी। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष खलक सिंह यादव का कहना है शासन की योजना अच्छी है। पर, भैंस पालन से शिक्षकों को दूर रखा जाए। शिक्षकों को इस कार्य में शामिल किए जाने से स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित होगा।
शुद्ध दूध से रहेंगे स्वस्थ
मैनपुरी। शिक्षक नेता रघुवीर सिंह यादव कहते हैं स्कूल में भैंस पालकर बच्चों को शुद्ध दूध पिलाने की योजना से कई लाभ होंगे। एमडीएम में शुद्ध दूध दिए जाने से बच्चों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
शासन की योजना के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों से सुझाव मांगे गए हैं। शासन की मंशा इसी सत्र में योजना को लागू करने की है। संबंधित विभागों से शीघ्र ही सुझाव देने को कहा गया है।
-विजय कुमार गुप्ता
मुख्य विकास अधिकारी