बसपा शासन में चयनित अंबेडकर गांव अब बदहाल है। जिले में चयनित 114 लोहिया गांवों में अधिकारी आए दिन पहुंचकर समस्याओं का निराकरण करते थे, अब वहां कूड़े के ढेर लगे हैं। तालाबों पर कब्जे हो गए हैं तो सड़कें बदहाल हो रही हैं जबकि ग्रामीण आवास और पेंशन की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन गांवों के लोगों की आसानी से सुनवाई नहीं होती है।
केस-1
विकास खंड बेवर का जीटी रोड किनारे का गांव झंडेहार बसपा शासन में रातों रात चमका भी दिया गया था। गांव की सड़कें पर डामर था। नल और बिजली की पूरी सुविधा थी। अब गांव में सफाई कर्मचारी नहीं आता है। कई सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीणों के सामने आवास, पेंशन पाने की समस्या है। तालाब में गंदगी भरी पड़ी है। ग्रामवासी विनय कुमार, अशोक, प्रवीन, भूरीदेवी, ओमवती, हीरालाल ने मूलभूत सुविधाएं दिलाने की डीएम से मांग की है।
केस-2
मैनपुरी का गांव गनेशपुर बसपा शासन में अंबेडकर गांव में जगह जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। गांव के तालाब पर कब्जा हो चुका है और गंदगी से भरा हुआ है। कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। गांव की नालियाें में कीचड़ भरा रहता है। सफाईकर्मी नियमित रूप से गांव में नहीं आता है। प्रधानपति संजू शाक्य, राकेश यादव, रिंकू, कुलदीप, गुड्डू, राजेश आदि का कहना है कि गांव में कम से कम साफ सफाई तो नियमित होनी ही चाहिए।
विकास कार्यों में कहीं भी भेदभाव नहीं किया जाता है। हर गांव में सफाई नियमित कराने के निर्देश हैं। कब्जा कहीं भी हो तत्काल हटाया जाता है। आवास और पेंशन के लिए पात्रता के आधार पर चयन किया जाता है। फिर भी अगर किसी को समस्या है तो शिकायत की जा सकती है। जांच के बाद तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
- लोकेश एम, जिलाधिकारी