दावे भले ही कितने किए जा रहे हों लेकिन इस साल आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सफर का सपना पूरा हो पाना मुश्किल है। आगरा से मैनपुरी के बीच में तमाम बड़े काम अधूरे पड़े हैं। अभी तक यह एक्सप्रेसवे इनररिंग रोड से भी लिंक नहीं हो पाया है। सड़क निर्माण तो दूर, इसके लिए मिट्टी भराव का कार्य भी अधूरा है।
प्रदेश सरकार ने 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से खोलने का ऐलान किया है। मगर, निर्माण कार्यों की स्थिति सरकार के इस दावे की हवा निकाल रही है। स्थिति यह है कि यह एक्सप्रेसवे अभी तक आगरा में इनर रिंग रोड़ से नहीं जुड़ा है। लखनऊ की ओर से एक्सप्रेसवे से आगरा की ओर उतरने के लिए और नोएडा की ओर से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए लिंक रोड़े पूरी हो चुकी हैं। मगर, आगरा की तरफ से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और लखनऊ की तरफ से नोएडा के लिए उतरने वाली लिंक रोड का काम आधे से भी ज्यादा बचा है। साइड रेलिंग भी नहीं लगी हैं। जानकारों की मानें तो इस काम को पूरा होने में कम से कम 20 दिन समय और लगेगा। फिनिशिंग कार्य भी अधूरे पड़े हैं। जबकि एक्सप्रेसवे शुरू होने के दावे में चार दिन ही शेष बचे हैं। इसके अलावा यमुना पर पुल का निर्माण कार्य भी पूरा नहीं हो सका है। बता दें कि 21 नवंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस एक्सप्रेसवे का शुभारंभ कर चुके हैं। मगर, कई जगह कार्य पूरा न हो पाने की वजह से आगरा-इटावा के बीच शुरू नहीं किया गया था। इसे 23 दिसंबर से खोलने का दावा किया गया है।
करहल में तीन में से एक
भी पुल का काम पूरा नहीं
ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे (आगरा-लखनऊ) मैनपुरी के करहल क्षेत्र में भी गुजरेगा। मगर, यहां भी काम अधूरा है। इसके लिए तहसील के 21 गांवों की 304 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि अधिग्रहीत की गई। तमाम प्रयासों और पूरी सरकारी मशीनरी लगने के बाद भी करहल क्षेत्र में अभी भी काफी निर्माण कार्य शेष है। करहल क्षेत्र में एक्सप्रेस वे के लिए तीन पुल बनाए गए हैं। इनमें से एक रेलवे क्रासिंग के पास, दूसरा इटावा-मैनपुरी मार्ग पर और तीसरा बंबा पर है। सीएम ने जब एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया, तब भी ये अधूरे ही थे। वर्तमान में भी यहां ज्यादा कुछ काम नहीं हुआ। माना जा रहा था कि महीने भर में करहल क्षेत्र के तीनों पुल पूरी तरह बनकर तैयार हो पाएंगे।
करहल से आगे नहीं जा सकेंगे वाहन
करहल में इटावा मैनपुरी मार्ग पर बन रहा पुल अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे में फीरोजाबाद से आने वाले वाहन करहल से आगे एक्सप्रेस वे पर नहीं जा सकेंगे। उन्हें यहां बन रहे इंटरचेंज से नीचे उतरना होगा। उसके बाद दोबारा एक्सप्रेस वे पर चढ़कर आगे जाना होगा।
फीरोजाबाद में आरओबी का काम अधूरा
अमर उजाला की फीरोजाबाद टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि आगरा से फतेहाबाद होते हुए आ रहे यह एक्सप्रेस-वे का दतावली पर लिंक करेगा। यहां पीटीसी कंपनी अंडरपास बनाने का काम कर रही है। लगभग 60 मीटर के यह अंडरपास हैं। हरगनपुर से जलालपुर तक करीब नौ अंडरपास बनाए गए हैं। निर्माणदायी कंपनी का सामान मौके पर ही पड़ा है। यहां मौजूद कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि लगभग काम पूरा हो चुका है। डामर आदि डालने का काम बाकी है। एक्सप्रेसवे के बीच में डिवाइडर पर लोहे का जाल लगाने के लिए डिवाइडर पर गड्ढे ही खोदे जा रहे हैं।
रेलवे पुल पर सबसे बड़ा अवरोध
सिरसागंज में भदान के पास दिल्ली-कानपुर रेलवे ट्रैक पर आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) का भी अधूरा है। नसीरपुर से मैनपुरी सीमा तक जगह-जगह एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर रेलिंग का काम होना बाकी रह गया है। गोटपुर से कठफोरी, गनपतपुर, भदान, नगला गुलाल, गढसान, नसीरपुर तक दर्जनों जगहों पर सड़क निर्माण की सामिग्री और गिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। यानी सिरसागंज क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे का बड़ा काम अधूरा है।
फिलहाल एक साइड शुरू हो पाएगी
शिकोहाबाद से लगभग 15 किमी दूर नसीरपुर क्षेत्र से निकाला जा रहा है। यहां पर अभी दिन-रात कार्य चालू है। 23 दिसंबर से एक्सप्रेस-वे की एक साइड (वन वे) चालू होगी। अभी एक्सप्रेस-वे पर गढ़रौली पर ब्रिज जोइंट का कार्य किया जा रहा है।