मैनपुरी। कुरावली क्षेत्र में करंट से वर्ष 2004 में किसान की मौत के बाद मुआवजा पाने के लिए पत्नी को 21 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। न्यायालय का आदेश मानने से बच रहे अधिशासी अभियंता नलकूप का जब वेतन रोका गया तो उन्होंने 245750 रुपये का भुगतान कर दिया। मुआवजे की धनराशि पीड़िता को उपलब्ध करा दी गई है।
कालाखेत की रहने वाली शहूरवती ने 11 अगस्त 2005 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में पति की करंट से हुई मौत के बाद मुआवजा दिलाने के लिए अधिशासी अभियंता नलकूप के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस याचिका की सुनवाई करके आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बीके जायसवाल, सदस्य बालकुमारी उर्फ बाला यादव, राजेश कुमार ने 4 जुलाई 2007 को 80000 रुपये का मुआवजा 10 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए थे।
नलकूप विभाग ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील दायर की। इस अपील की सुनवाई कर राज्य आयोग के पीठासीन अधिकारी सुशील कुमार और सुधा उपाध्याय ने 4 सितंबर 2024 को इसे खारिज कर दिया। राज्य आयोग में नलकूप विभाग की ओर से 37385 रुपये जमा किए गए थे। इसके बाद शहूरवती ने मुआवजा दिलाने के लिए जिला आयोग में आवेदन किया। सुनवाई करने के बाद जिला आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास, नंदकुमार ने आदेश दिया कि पीड़िता को मुआवजे की धनराशि का भुगतान किया जाए।
जिला आयोग में अधिशासी अभियंता नलकूप के हाजिर नहीं होने पर पहले आरसी जारी की गई। इसके बाद उनके खिलाफ बिना जमानती वारंट जारी किए गए। जब वह आयोग में हाजिर नहीं हुए तो उनका अगले आदेश तक वेतन रोकने का निर्देश कोषाधिकारी को दिया गया। वेतन रुकने के बाद अधिशासी अभियंता नलकूप ने पीड़िता को मुआवजे का भुगतान करा दिया।