जिलाधिकारी ने शनिवार ेको जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां पर मिली अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए स्वास्थ्य सुविधाएं ठीक करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी लोकेश एम ने निरीक्षण में पाया कि अस्पताल का संचालन मानकों के हिसाब से नहीं हो रहा। अधिकांश नर्स इंजेक्शन, ड्रिप, ब्लड प्रेसर घटने, बढ़ने पर प्रयोग किए जाने वाले इंजेक्शन आईएम, आईबी के बारे में नहीं बता सकीं। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए एक सप्ताह में सुधार के निर्देश दिए। दवा वितरण कक्ष में मात्र दो एंटीबायोटिक टैबलेट मिली। जबकि मानक के हिसाब से कम से कम पांच टैबलेट होनी चाहिए। फिजिशियन के पास न तो ब्लड प्रेसर मापक यंत्र मिला और ना ही टार्च। स्टाफ एप्रिन भी नहीं पहने मिला। कई चिकित्सक थर्मामीटर भी नहीं लिए थे। वार्डों में भर्ती मरीजों को तकिए तक नहीं दिए गए। उन्होंने सर्जिकल वार्ड, बाल रोग वार्ड, मेडिकल वार्ड ,मरहम पट्टी वार्ड का भी निरीक्षण किया। वार्ड में भर्ती जबर सिंह, बहादुर सिंह उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधा के बारे में जानकारी ली।
अल्ट्रासाउंड बाहर से लिखे जाने, अस्पताल में दलालों के रहने की शिकायत पर जांच के आदेश दिए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पहला निरीक्षण था इसलिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। एक सप्ताह बाद पुन: निरीक्षण करूंगा यदि सुधार नहीं हुआ तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी केके शर्मा से कहा कि वह सभी स्टाफ को एक बार प्रशिक्षण दिलाकर कमियों को दूर कराए। पूरे स्टाफ ड्यूटी के दौरान एप्रिन पहने।