मैनपुरी। जिले में गेहूं खरीद के लिए खोले गए 79 गेहूं क्रय केंद्रों पर तमाम प्रशासनिक कवायद के बाद भी किसान नहीं आ रहे हैं। प्रशासन ने मंडी में आढ़तियों और आटा मिल मालिकों पर भी दबाव बनाया लेकिन फिर भी ढाई माह बीतने के बाद भी लक्ष्य के सापेक्ष महज 16.50 फीसदी गेहूं की खरीद हो सकी है। खरीद के लक्ष्य 59540 मीट्रिक टन के सापेक्ष अब तक केवल 9649 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा सकी है।
जनपद में किसानों को उनके गेहूं की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक अप्रैल को विभिन्न एजेंसियों के 79 क्रय केंद्र खोले गए हैं। शासन द्वारा 1450 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य भी निर्धारित किया गया है। जबकि मंडी में मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल है। किसान तमाम परेशानियों से बचने के चक्कर में मंडी में ही गेहूं बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। नगरिया के किसान राघवेंद्र सिंह का कहना था कि सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचना आसान नहीं है। केंद्र के कर्मचारी गेहूं में कमी दर्शाकर वापस लौटा देते हैं। वहीं भुगतान में भी परेशानी आती है। ऐसे में मंडी में भले ही कुछ कम दाम मिलें भुगतान नकद मिल जाता है।
उधर खरीद का लक्ष्य पूरा न होते देख प्रशासन ने आढ़तियों और व्यापारियों पर दबाव बनाया कि किसान का गेहूं न खरीदें। वहीं किसानों को फोन किए गए और लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं तहसील कर्मियों को गांव-गांव जाकर किसानों को खरीद केंद्रों पर लाने को प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक कवायदों के बाद भी अधिकांश क्रय केंद्रों पर सन्नाटा सा पसरा नजर आता है।
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सभी क्रय केंद्र प्रभारियों को समय सीमा के अंदर खरीद का लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। कोई क्रय केंद्र प्रभारी यदि अनावश्यक रूप से किसानों को परेशान करेगा तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रदेश में खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। आगरा मंडल में अब तक जिले में सबसे अधिक गेहूं खरीदा जा चुका है।
एसएमएच जाफरी
जिला विपणन अधिकारी