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नगला किसी में करुण क्रंदन

Tue, 17 Jun 2014 05:30 AM IST
Mainpuri
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घिरोर(मैनपुरी)। नगला किसी निवासी सिपाही दिनेश प्रताप की हत्या की खबर रात दो बजे आई तो घर में कोहराम मच गया। पत्नी बबिता को भले ही दिनेश की मौत की सूचना नहीं दी गई लेकिन सूचना मिलने पर परिवारीजनों के चेहरों के भाव और तत्काल फीरोजाबाद रवाना होने से वह समझ गई कि पति के साथ कोई अनहोनी हुई है। दिनेश के दोनों बच्चे भी घर में रोने की आवाजें सुनकर जाग गए और वह भी रोने लगे। गांव में रात दो बजे के बाद से शुरू हुआ करुण क्रंदन दोपहर सवा दो बजे उस समय और तेज हो गया जब दिनेश का शव लेकर अधिकारी नगला किसी पहुंचे। शाम को शहीद सिपाही दिनेश का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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नगला किसी निवासी दिनेश वर्ष 2006 में मैनपुरी से सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वह फीरोजाबाद के थाना रामगढ़ में तैनात थे। रविवार की रात कोबरा गश्त पर गए दिनेश और उनके साथी गिरिराज की बदमाशों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। पुलिस अधिकारियाें ने रात दो बजे उनके पिता सेवानिवृत्त लेखपाल ईश्वर दयाल जाटव को सूचना दी। सूचना मिलते ही ईश्वरदयाल और परिवार के लोग रात में ही फीरोजाबाद के लिए रवाना हो गए।
पिता ने दिनेश की हत्या की सूचना सीआरपीएफ में डिप्टी एसपी के पद पर पश्चिमी बंगाल में तैनात बड़े पुत्र देवेंद्र कुमार को दी। बेटे की मौत के सदमे से दिनेश की मां राम प्यारी और पत्नी बबिता तो जैसे सुधबुध ही खो बैठी। मां राम प्यारी तो बस यही कहे जा रहीं थीं कि जिगर का टुकड़ा अब कहां मिलेगा। वहीं पत्नी बबिता तो बार-बार बेहोश हो जाती और होश आने पर इधर-उधर दौड़ने लगती। ऐसे में कई लोगों को उन्हें संभालना पड़ता। पुत्र कुणाल (8) और मयंक (6) का भी रो-रोकर बुरा हाल था। मासूम मयंक तो कु छ समझ ही नहीं पा रहा था लेकिन उससे बड़ा कुणाल लोगों से पूछता कि पापा को किसने मारा है। सुबह होते ही जब क्षेत्र के लोगों को दिनेश की हत्या की जानकारी हुई सैकड़ों लोग उनके घर पहुंच गए। दोपहर 2:25 बजे सिपाही का शव लेकर सीओ टूंडला केहर सिह राणा, इंस्पेक्टर टूंडला राजेंद्र सिंह, थानाध्यक्ष नगला सिंधी अजय सिंह पुलिस बल के साथ शव लेकर गांव पहुंचे। सीओ कुरावली सुरेशवीर सिंह, इंस्पेक्टर घिरोर मेहराज अली खां भी पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए। शव पर पुष्प अर्पित करने के बाद शव यात्रा घर से शुरू हुई। मां राम प्यारी और पत्नी बबिता शव से अलग ही नहीं हो रही थीं। शाम चार बजे सिपाही का शव लेकर परिवारीजन और पुलिस अधिकारी गांव के बाहर शमशान स्थल पर पहुंचे। वहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि बड़े पुत्र कुणाल ने दी।
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पिता का हाथ बंटाना कभी नहीं भूला
मैनपुरी। सिपाही दिनेश प्रताप अपने पिता ईश्वर दयाल की आंखों का तारा था। जब भी वह छुट्टी लेकर गांव आता तो पिता के काम में हाथ बंटाना नहीं भूलता था। फीरोजाबाद में तैनाती के दौरान वह बच्चों के साथ शिकोहाबाद में कमरा लेकर रहता था। पत्नी बबिता की मां की पांच दिन पहले हुई मौत के बाद दिनेश तीन दिन पहले अपनी ससुराल मानिकपुर थाना भोगांव आया था। ससुराल से ड्यूटी पर जाते समय वह मां से मिला था। बच्चों के स्कूल में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के बाद एक महीने पहले ही बबिता बच्चों के साथ गांव आ गई थी। दिनेश के चचेरे भाई अवधेश की मानें तो भइया रोजाना मोबाइल पर फोन करके भाभी से पहले ताऊ और ताई से बात करते थे। उनसे बात करने के बाद भाभी से हालचाल पूछकर कुणाल और मयंक से बात करना नहीं भूलते थे। अवधेश ने बताया कि जब वह छुट्टी लेकर गांव आते थे तो ताऊ का हाथ बंटाना नहीं भूलते थे। घर आने पर परिवारीजनों के साथ ही पड़ोस के बुजुर्गों से भी उनकी कुशलक्षेम पूछना नहीं भूलते थे। शायद यही वजह थी कि पुलिस में होने के बाद भी मिलनसार दिनेश की हत्या की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया।

सदमे में आई बहन
दिनेश की बड़ी बहन रेखा की शादी फीरोजाबाद के मोहल्ला टीला में हुई है। दिनेश की हत्या की खबर रात में ही पिता ने रेखा को दे दी। भाई की चहेती बहन सूचना मिलते ही फीरोजाबाद अस्पताल पहुंच गई। भाई का शव देख वह सदमे में आ गई। बेटा खोने के बाद पिता ईश्वर दयाल पुत्री की हालत देख बेहद परेशान हुए। उन्होंने सुबह तड़के ही रेखा को गांव भेज दिया। गांव पहुंची रेखा का और बुरा हाल था। वह रो-रोकर एक ही बात कह रही थी कि बदमाश भाग जाते लेकिन भइया की हत्या क्यों कर दी। भइया ने तो बदमाशों का कुछ भी नहीं बिगाड़ा था।

शोक में नहीं जले चूल्हे
मिलनसार सिपाही दिनेश जाटव की हत्या की सूचना रविवार की रात ही गांव में मिल गई थी। सोमवार को दिनेश के घर पर गांव के लोग पहुंच गए। अधिकांश घरों में तो शोक के चलते चूल्हा ही नहीं जला। शाम तक सिपाही के घर लोगों के आने जाने का तांता लगा रहा।

नेताओं के न पहुंचने से असंतोष
सिपाही दिनेश की हत्या की क्षेत्र में खबर होने के बाद भी कोई भी जनप्रतिनिधि दिलासा देने के लिए उनके घर नहीं पहुंचा। बड़े नेता तो दूर छोटे नेता भी वहां नहीं गए। दोपहर बाद बसपा जिलाध्यक्ष दीपक पेंटर साथियों के साथ गांव पहुंचे और शोक संतृप्त परिवारीजनों को ढाढ़स बंधाया। उनका कहना था कि प्रदेश में अपराध चरम पर है। अपराधी निरंकुश हैं। जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा की क्या गारंटी है।
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