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कागजों में ही चमचमा रहा लोहिया गांव तिगवां

Tue, 17 Jun 2014 05:30 AM IST
Mainpuri
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बेवर। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं में भले ही लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना शामिल हो। अधिकारियों को गांवों के सर्वांगीण विकास के निर्देश हों। कागजों में विकास कार्य भी पूरा हो पर वास्तव में लोहिया गांवों के हालात अच्छे नहीं है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को विकास खंड बेवर के लोहिया ग्राम तिगवां का दौरा किया तो हकीकत कुछ और ही निकली।
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विकास खंड बेवर क्षेत्र के ग्राम तिगवां को वित्तीय वर्ष 2012-13 में लोहिया गांव घोषित किया गया। गांव लोहिया घोषित होने पर ग्रामीणों को कई उम्मीदें थीं लेकिन गांव में विकास कार्य उनकी उम्मीद के हिसाब से नहीं हुए। गांव में बने 40 शौचालय आज तक शुरू नहीं हो सके। शौचालयों के लिए मात्र ढाई-ढाई फुट के टैंक बनवाए गए। इनमें भी मानकों की अनदेखी हुई।
भले ही अधिकारी लोहिया गांव तिगवां को कागजों में संतृप्त दिखा रहे हों लेकिन गांव का मुख्य मार्ग और अधिकांश गलियां अभी भी कच्ची हैं। गांव में बनवाई गई एक सड़क दो महीने में ही बदहाल हो गई। मानकों की अनदेखी की शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ। गांव में तैनात सफाई कर्मचारी कभी भी सफाई के लिए नहीं आता।
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बिना पैसे के नहीं बदला ट्रांसफार्मर
गांव में सुरेंद्र सिंह यादव के मकान के पास ट्रांसफार्मर लगा है। दो साल पहले ट्रांसफार्मर फुंक गया। एक वर्ष पूर्व चंदा कर पैसे देकर ट्रांसफार्मर बदलवाया गया। कुछ ही दिन में फिर फुंक गया। ग्रामीण सुरेंद्र, बृजनंदन, रूपकिशोर, बिल्लू, रामलड़ैते, सुधीर कुमार आदि का कहना है कि पैसे न देने पर ट्रांसफार्मर नहीं बदला जा सका।
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नहीं मिले आवास और पेंशन
गांव के ही विकलांग जितेंद्र सिंह और उनकी मां रामलडै़ती को न तो आवास मिले और न ही पेंशन। गांव के ताले सिंह को भी पेंशन और आवास नहीं मिला। कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को उम्मीद थी कि लोहिया गांव होने पर लोहिया आवास और सुविधाएं मिलेंगी लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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