मैनपुरी। बाल श्रमिकों के उन्मूलन के लिए शुरू की गई राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना जनपद में शुरू ही नहीं हो सकी है। जिले में बाल मजदूरों को शिक्षित करने के लिए अब तक कोई स्कूल नहीं खोला गया है। इसका कारण श्रम प्रवर्तन विभाग द्वारा जिले में कोई बाल श्रमिक न होने की सूचना शासन को भेजना माना जा रहा है। हकीकत यह है कि अधिकांश ढाबों, दुकानों आदि पर बाल मजदूर दिखते हैं।
शासन ने वर्ष 2006 में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना शुरू की थी। इसके तहत बाल श्रमिक विद्यालयों में तीन साल का पाठ्यक्रम लागू किया गया। इस पाठ्यक्रम के तहत 11 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बाल श्रमिक बच्चों को शिक्षित करना था। श्रम विभाग को जिले में कहीं बाल मजदूर ही नहीं मिले। इसके चलते जिले में कोई बाल श्रमिक विद्यालय नहीं खोला गया।
श्रम प्रवर्तन विभाग की मानें तो जिले में बाल श्रमिक न होने के चलते अभियान नहीं चलाया जा रहा है। जबकि जिले में अधिकांश ढाबों, चाय की दुकानों, परचून की दुकानों पर बाल श्रमिक काम करते दिखते हैं। इस संबंध में श्रम प्रवर्तन अधिकारी विक्टर जॉन से जानकारी चाही तो उनका मोबाइल स्विच ऑफ था।
विभाग के पास नहीं हैं आंकड़े
जनपद में कितने बाल श्रमिक काम कर रहे हैं इस संबंध में विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है। नियमानुसार 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों से काम कराना अपराध है। बाल श्रमिकों से काम कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। बच्चों को मुक्त कराकर संबंधित दुकानदार से 25 हजार रुपये जुर्माना वसूलकर बच्चे का पालन पोषण कराया जाता है। लेकिन विभाग ने अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की।