मैनपुरी। आपका थोड़ा सा प्रयास थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को खुशहाल जिंदगी दे सकता है। जिले में लगभग 60 बच्चे इस रोग से पीड़ित है। इन्हें प्रत्येक तीन माह में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। जिले में कोई थैलीसीमिया सोसाइटी नहीं है।
शायद कई लोग इस बीमारी से परिचित न हों। लेकिन जिले में थैलीसीमिया से पीड़ित लगभग 60 बच्चे हैं। जिले में ब्लड चढ़ाने की व्यवस्था न होने से इनमें से अधिकांश बच्चों को अभिभावक आगरा, कानपुर या सैफई ले जाते हैं। यदि आप थोड़े से जागरूक हों तो इन बच्चों को जिले में ही रक्त उपलब्ध कराकर न केवल इनकी जान बचाई जा सकती है इन्हें खुशहाल जीवन भी दिया जा सकता है।
जिला अस्पताल में भी थैलीसीमिया से पीड़ित रोगी आते हैं।
यह है थैलीसीमिया
थैलीसीमिया बीमारी क्रोमोसोम एब्नार्मलिटी के कारण होती है। इस बीमारी में रोगी के शरीर में आरबीसी की संख्या कम होने लगती है।ऐसे मरीजों का हीमोग्लोबिन लगातार कम होता रहता है। ऐसे मरीजों में खून को मेनटेन रखने के लिए प्रत्येक तीन माह में रक्त चढ़वाना पड़ता है। समय से ब्लड न मिलने पर थकान, कमजोरी, सुस्ती काम में मन न लगना, इन्फेक्शन और अन्य बीमारियां हो जाती है। समय से खून न मिलने पर रोगी की मौत भी हो सकती है।
केस नंबर एक
नगर निवासी अजय (7) थैलीसीमिया से पीड़ित है। पहले तो परिवारीजन और रिश्तेदार रक्त देते रहे। अब अजय को जिले में ब्लड ही नहीं मिलता। मजबूरन आगरा ले जाना जाना पड़ रहा है।
के स नंबर दो
किशनी क्षेत्र निवासी अनमोल (13) को थैलीसीमिया है। अनमोल को परिवारीजन पहले मैनपुरी लाते थे। मैनपुरी में ब्लड की व्यवस्था न होने पर अब सैफई ले जाते हैं। अनमोल की मां गुड्डी का कहना है कि यदि जिले में ही ब्लड मिलने लगे तो उन्हें बाहर क्यों भटकना पड़े
केस नंबर तीन
मंगलवार को थैलीसीमिया से पीड़ित नगर निवासी अनिल (11) को परिवारीजन रक्त के लिए जिला अस्पताल ले गए। वहां ओ निगेटिव ब्लड न होने की बात कही गई। मजबूरन अनिल को परिवारीजन आगरा ले गए।
यह कहते हैं चिकित्सक
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर पीके गुप्ता का कहना है कि थैलीसीमिया के रोगी काफी कम मिलते हैं। उनके पास महीने में एक या दो रोगी ही इस बीमारी से पीड़ित आते हैं। यदि लोग जागरूक होकर रक्तदान करें तो इन रोगियों को आसानी से रक्त दिया जा सकता है।