मैनपुरी। हिंदुओं का प्रमुख पर्व देवोत्थान (एकादशी) बुधवार को मनाया जाएगा। इसे मनाने के लिए पूरे दिन घरों और मंदिरों में तैयारियां होती रहीं। घरों में महिलाओं ने अल्पना बनाने की तैयारी की वहीं पूजा अर्चना के लिए गन्ना और सिंघाड़े खरीदे। मंदिरों में भी भगवान विष्णु को जगाने के लिए तैयारियां की गईं। देवोत्थान के साथ ही चार माह से रुके मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
बुधवार को देवोत्थान एकादशी के दिन मंदिरों में सुबह से ही भगवान विष्णु और उनके सहयोगियों का पूजन करने के बाद शंख, घंटा, घड़ियाल बजाए जाएंगे। प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत पंडित शील नामाचार्य ने बताया कि चार माह बाद देवों को जगाया जाएगा। सुबह तड़के भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ घंटे, घड़ियाल बजाए जाएंगे। उधर घरों में देवोत्थान के लिए महिलाएं तैयारियों में जुटी रहीं। घर के आंगन में अल्पना बनाने के लिए चावल भिगोए गए। इन चावलों को सुबह पीसकर उससे अल्पना बनाई जाएगी। गन्ना और सिंघाड़े से भगवान की पूजा अर्चना की जाएगी और भजन-कीर्तन भी होंगे।
देवोत्थान पर्व से एक दिन पूर्व ही जगह-जगह गन्ने और सिंघाड़ों की सड़क के किनारे दुकानें सज गईं। इन्हें बेचने वाले पर्व को देखते हुए मनमाने पैसे वसूल करते नजर आए। कहीं पांच रुपये से छह रुपये में तो कहीं दस रुपये प्रति किलो तक में गन्ने बिकते दिखाई दिए। यही हाल सिंघाड़ों का रहा। सिंघाड़े भी 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचे गए।
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भगवान विष्णु का शयनकाल होगा समाप्त
ज्योतिषाचार्य पंडित आशुतोष मुखर्जी श्रीकुल ने बताया कि देवोत्थान पर्व से ही वर्षाकाल समाप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयनकाल समाप्त कर देते हैं। वह प्रकृति को आह्वादित करने के लिए अपनी भार्या श्री और लक्ष्मी को समस्त ब्रह्मांड में ऐश्वर्य बिखेरने के लिए भेज देते हैं। इसी दिन से वर्षा का चातुर्मास समाप्त हो जाता है। शुभ कार्यों और विवाह इत्यादि की इसी दिन से शुरूआत होती है। यह पर्व ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वर्षा ऋतु की सर्वोत्तम फसल ईख और सिंघाड़े इसी दिन से खाने योग्य माने जाते हैं।
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आज से रहेगी शादी समारोहों की धूम
मैनपुरी। देवोत्थान पर्व पर शादी समारोह की धूम के चलते मंगलवार को अधिकांश ब्यूटी पार्लरों पर सजने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। वहीं लहंगा, लांछा और ज्वेलरी बुकिंग के लिए भी अच्छी खासी भीड़ नजर आई। ब्यूटी पार्लरों और दुकानों पर देवोत्थान के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।
शादी समारोह में तैयार होने के लिए ब्यूटी पार्लर में सजने के बाद महिलाएं और युवतियां लहंगा और लांछा के अलावा ब्राइडल ज्वेलरी की बुकिंग कराती नजर आईं। ब्राइडल ज्वेलरी में अकबर जोधा, राजस्थानी, हैदराबादी ज्वेलरी की अधिक मांग थी। इन्हीं नामों को लेकर युवतियां पार्लरों एवं अन्य केंद्रों पर ज्वेलरी होने की बात पूछ रही थीं। ज्वेलरी की बुकिंग 300 रुपये से लेकर एक हजार रुपये में की जा रही थी।
आकर्षक दिखने की चाह में बेहतर लहंगा की बुकिंग ही हर कोई कराना चाह रहा था। सिमर, नेट, जार्जट, कलीदार और फिसकट लहंगा की अधिक मांग थी। केंद्रों पर 400 रुपये से लेकर डेढ़ हजार रुपये तक में लहंगा बुक किए जा रहे थे। लांछा की बुकिंग तीन सौ रुपये से सात सौ रुपये तक में हो रही थी। ब्यूटी पार्लर संचालिका सुमन ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष युवतियों की अधिक भीड़ हो रही है। उनके यहां से ही दो दर्जन से अधिक लहंगा और ब्राइडल ज्वेलरी बुक कराई गई है।