मैनपुरी। सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की रीढ़ जन सूचना अधिकारी हैं। इस एक्ट के लागू होने के बाद शासकीय कार्यों में गोपनीयता नहीं रही है बल्कि पारदर्शिता आई है। अब भारत का कोई भी नागरिक दस्तावेजों की फोटोकापी निर्धारित शुल्क देकर प्राप्त कर सकता है। जन सूचना अधिकारी इसमें शिथिलता न बरतें।
यह निर्देश राज्य सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश ज्ञान प्रकाश मौर्य ने डीआरडीए सभाकक्ष में लंबित संदर्भों की समीक्षा के दौरान जन सूचना अधिकारियों को दिए। उन्होंने समीक्षा में पाया कि बेसिक शिक्षा कार्यालय में एक अप्रैल 2011 से 31 अक्तूबर 2013 तक 527 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिसमें से 480 का निस्तारण हुआ। 47 निस्तारण के लिए शेष हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में 132 के सापेक्ष 126 निस्तारित किए गए। छह शेष हैं। तहसील सदर में 462 आवेदनों के सापेक्ष 411 पर सूचना उपलब्ध कराई गई है। 51 आवेदन शेष हैं। तहसील भोगांव में 556 और तहसील करहल में 146 आवेदन प्राप्त हुए हैं। लंबित आवेदनों पर तत्काल सूचना उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई निरक्षर, विकलांग कार्यालय में सूचना अधिकार के तहत सूचना मांगने आए तो उसका आवेदन पत्र कार्यालय के किसी कर्मचारी से या स्वयं लिखें और आवेदनकर्ता को पढ़कर सुनाएं। 30 दिन की निर्धारित अवधि के अंदर सूचना उपलब्ध न कराने पर आवेदनकर्ता से चाहे गए दस्तावेजों की निर्धारित धनराशि न लिए जाने का प्रावधान है।