महोबा। कीरत सागर के तट पर पिछले 13 वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की अनूठी साधना चल रही है। यहां पढ़ाई और कंप्टीशन की तैयारी करने वाले युवाओं की भीड़ उमड़ती है। संसाधनों के अभाव से जूझ रहे युवा छात्र दूरदराज से यहां पर आते हैं और समूह बनाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। तेहर साल में आपस में पढ़ाई करके 10 हजार युवा रोजगार भी पा चुके हैं।
सिद्दू, बृजेश, फिरोज, राकेश, रहूफ, मूलचंद्र, श्याम बिहारी, शंकर, प्रमोद, पंकज समेत कई युवक मेधावी हैं, लेकिन परिवार की माली हालत ठीक न होने के चलते शहर के बाहर जाकर पढ़ने और कोचिंग की फीस चुका पाने में असमर्थ थे। प्रतियोगी परीक्षा देने ये लोग अक्सर लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद जैसे महानगरों में जाते थे। वहां इन्होंने छात्रों को समूह में पढ़ाई करते देखा। ऐसे में इनमें समूह बनाकर पढ़ने का ख्याल आया, ताकि एक-दूसरे की मदद से आगे बढ़ सकें। इसी सोच के साथ वर्ष 2007 में ऐसे छात्रों का क्लब बनाने की तैयारी की गई। तलाश थी ऐसे स्थान की जहां पर सुकून से पढ़ाई की जा सके। ऐसे में ऐतिहासिक कीतर सागर ने इन्हें आकर्षित किया। यहां तालाब के किनारे बने तट पर क्लब का संचालन होने लगा।
यहां क्लब का सदस्य बनने के लिए कोई फीस नहीं चुकानी पड़ती। हां, नियमित पहुंचने की शर्त जरूर पूरी करनी पड़ती है। यहां सीनियर अपने जूनियरों को गाइड करते हैं तो जूनियर भी मैथ्स, रीजिनिंग, करेंट अफेयर्स का ज्ञान सीनियरों से साझा करते हैं। क्लब इतना लोकप्रिय हो गया कि तमाम ग्रामीण छात्र गांवों से शहर आकर बस गए और यहां प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने में जुट गए। क्लब बनने के दो साल के भीतर ही मूलचंद्र, शंकर, श्याम बिहारी, प्रमोद रेलवे में चयनित हो गए। क्लब का संचालन अभी भी जारी है। यहां दूरदराज से प्रतिदिन करीब पांच सौ युवा प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने आते हैं।
अब तक 10 हजार को मिली नौकरी कीरत सागर तट पर संचालित क्लब में पढ़ाई कर करीब 10 हजार युवा नौकरी पा चुके हैं। रेलवे में ग्रुप डी, ड्राइवर व अन्य पदों पर पांच हजार से ज्यादा युवाओं ने सफलता पाई है। पुलिस विभाग में भी यहां से करीब दो हजार से अधिक युवा कामयाबी प्राप्त कर चुके हैं। यूपीएसएसएससी के माध्यम से क्लर्क पद पर 25, ट्यूबवेल आपरेटर पर 15 पदों पर यहां पढ़ाई करने वाले युवा सफलता पा चुके हैं। अन्य विभागों में भी कई पदों पर युवाओं ने कामयाबी की इबारत लिखी है।
कीरत सागर के तट पर युवा महानगरों की तर्ज पर प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई करते हैं। इलाहाबाद, पटना, कानपुर समेत महानगरों में पढ़ाई का पैटर्न क्या है, प्रतियोगी छात्र कौन-कौन की किताबों की अध्ययन करते हैं, इन सबकी जानकारी लेकर यहां भी उसी स्तर की अध्ययन सामग्री की व्यवस्था की जाती है। एक किताब को पांच-छह छात्र पैसे जुटाकर खरीदते हैं। फिर बारी-बारी किताब को पढ़कर नोट तैयार करते हैं।
कीरत सागर तट पर प्रतियोगी युवा पढ़ाई करते हैं। वहां संसाधनों की कमी है। यहां संसाधनों की उचित व्यवस्था कराई जाएगी, ताकि छात्रों की किसी तरह की दिक्कत न हो।
-सत्येंद्र कुमार, डीएम।
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