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स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं ने अपनाया रोजगार

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महोबा। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से संपन्न होने के साथ-साथ घर का बोझ उठा रही हैं। महिलाओं के कमाने से अब बच्चों को अच्छी परवरिश के साथ-साथ बेहतर शिक्षा भी मिल रही है। साथ ही अब पति पर भी खर्च का बोझ कम हो गया है।
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विकासखंड जैतपुर के ग्राम बुधवारा में महिलाओं ने समूह बनाकर रोजगार के साधन अपनाए हैं। कोई समूह के माध्यम से कढ़ाई-बुनाई, किराना व्यवसाय तो कोई रस्सी बनाकर रोजगार अपना रहा है। इससे महिलाओं को घर बैठे गांव में रोजगार मिल रहा है। साथ ही महिलाओं की झिझक भी खत्म हो रही है और महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। महिलाओं द्वारा चलाई जा रहे निजाम सहायता समूह में 13 महिलाएं और लक्ष्मी सहायता समूह में 12 महिलाएं जुड़ी हैं। नियोजन निधि के तहत इन समूहों को आर्थिक सहायता दी जाती है। जिससे महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आगे बढ़ सके। महिलाओं ने स्टेट बैंक से समूह के माध्यम से दो साल पहले पहले ऋण लिया। जिसे रोजगार करके अदा कर दिया और अब बचत के पैसे से रोजगार कर रही हैं।
आचार बनाकर बढ़ा रहीं परिवार की आय
ग्राम बुधवारा निवासी जानकी देवी कहती हैं कि वह डेढ़ साल पहले समूह से जुड़ी थीं। समूह में रहकर उन्होंने आचार बनाना सीखा। इसके बाद उसकी बिक्री कर परिवार चला रही है। समय मिलने पर मच्छरदानी की सिलाई करके भी आय के साधन बढ़ाए हैं। इससे अब बच्चों की भी अच्छी परवरिश हो रही हैं।
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सिलाई करके अपनाया रोजगार
निजाम स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सफीना कहती हैं कि उन्होंने दो साल पहले समूह बनाया। समूह के जरिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर कुछ मशीनें खरीदीं। गांव की तमाम महिलाओं को सिलाई सिखाकर रोजगार से जोड़ा। आज समूह की महिलाएं सिलाई करके परिवार चला रही हैं। सफीना भी गांव में सिलाई करके बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहीं हैं।
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