नोट = शिक्षक दिवस पर विशेष
-जिले के कई शिक्षकों ने अपनी मेहनत की दम पर बदल दी बेसिक स्कूलों की तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। सरकारी स्कूल का नाम आते ही लोगों के दिमाग में एक अलग तरह की नकारात्मक तस्वीर उभरती है। जर्जर सा भवन, टूटी फर्श और बिना अनुशासन के इधर-उधर घूमते हुए बच्चे, लेकिन जिले में कई शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत व अच्छी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अपने विद्यालयों को कान्वेंट विद्यालयों की तर्ज पर विकसित कर दिया है। न केवल विद्यालयों का परिवेश सुंदर किया है बल्कि बच्चों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया है।
ऐसा बदला परिवेश कि कई गांवों के बच्चे पहुंचने लगे स्कूल
फोटो 04 एमएएचपी 17 परिचय-रामकुमारी नायक। संवाद
विकासखंड कबरई के कस्बा श्रीनगर में प्राथमिक विद्यालय कुल्लाई पहाड़िया नाम से एक विद्यालय है। कानपुर-सागर हाईवे के किनारे स्थित इस स्कूल में वर्तमान में 236 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रामकुमारी नायक ने जब वर्ष 2018 में यहां पर ज्वाइन किया। तब बच्चों की संख्या 67 थी। विद्यालय भवन, परिवेश को सुधारने का प्रयास इन्होंने किया। शासन ने विद्यालय को इंग्लिश मीडियम कर दिया। बच्चों को पढ़ाने के साथ शैक्षिक गतिविधियां कराते हुए उन्होंने अभिभावकों के मन में विश्वास जगाया और कान्वेंट की तर्ज पर ब्लू, रेड, ग्रीन व यलो हाउस का संचालन शुरू किया। धीरे-धीरे आसपास के कई गांवों के बच्चे निजी विद्यालयों को छोड़कर इस विद्यालय में आने लगे। विद्यालय आने के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था भी विद्यालय के शिक्षकों ने कराई है। गरीब बच्चों के किराये का भार भी विद्यालय परिवार उठाता है।
छुट्टी के बाद शुरू होती है बेहतर कल की तैयारी
फोटो 04 एमएएचपी 18 परिचय-तेज कुमार निरंजन। संवाद
ब्लॉक कबरई के प्राथमिक विद्यालय हिलुआ का परिसर देखने में किसी पार्क से कम नहीं है। स्कूली बच्चों के लिए झूले, परिसर में बैठने के लिए कुर्सियां, मेज, हरा-भरा ईको गार्डन और मंदिर को देखकर मन खुशी से भर जाता है। यहां के प्रधानाध्यापक तेज कुमार निरंजन बताते हैं कि विद्यालय में पढ़ाई के साथ अवस्थापना सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रत्येक कक्ष में बच्चों के लिए कूलर लगाए गए हैं। ऑडियो-विजुअल से पढ़ाई होती है। स्कूल से बच्चों की छुट्टी होने के बाद विद्यालय के सभी शिक्षकों की मदद से अगले दिन की कार्ययोजना बनाते हैं। इस दौरान शैक्षिक गतिविधियों की रूपरेखा तय करने के साथ ही परिसर के गार्डन की देखभाल की जाती है। कमजोर बच्चों के लिए अलग से कक्षा का संचालन भी करते हैं।
प्रतियोगिताओं की तैयारी कराने में अव्वल है इनका विद्यालय
फोटो 04 एमएएचपी 19 परिचय-कृष्णकांत श्रीवास्तव। संवाद
विकासखंड चरखारी के खरेला क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय पूंछा को जिले में अलग ही पहचान मिली है। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में हर वर्ष यहां से बच्चों का चयन होता है। यहां के प्रधानाध्यापक कृष्णकांत श्रीवास्तव स्वयं ही बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयार करते हैं। वे बताते हैं कि नियमित कक्षा संचालन के बाद जब सभी बच्चे घर चले जाते हैं। तब वे कक्षा-आठ में पढ़ने वाले उन बच्चों की अलग कक्षा लगाते हैं, जो इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। कई बार तो अवकाश के दिनों में भी कक्षा लगती है। वर्ष 2023 में उनके विद्यालय से दो बच्चों, वर्ष 2024 में पांच बच्चों और वर्ष 2025 में सात बच्चों का चयन हुआ। इस वर्ष सर्वाधिक नौ बच्चों का चयन हुआ। यह परीक्षा पास करने वाले बच्चों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिमाह 1,000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है।
फोटो 04 एमएएचपी 17 परिचय-रामकुमारी नायक। संवाद
फोटो 04 एमएएचपी 17 परिचय-रामकुमारी नायक। संवाद