महोबा। फरवरी में मार्च जैसा मौसम होने से गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं के पौधे बढ़ नहीं रहे हैं। कई जगहों पर अभी तक बालियां नहीं निकली हैं। वहीं, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इसी तरह मौसम रहा तो पौधे छोटे रह जाएंगे, दाने कमजोर हो जाएंगे। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। हालांकि, पहले बुआई करने वाले किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा।
जिले में इस साल 87 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई की गई है। गेहूं की बुआई का सही समय नवंबर के मध्य तक ही माना जाता है, लेकिन बहुत से किसान खेत खाली होने के कारण पहले ही बुआई कर देते हैं। ऐसी फसल में जनवरी के बाद बालियां निकलने लगती हैं। मार्च में फसल पकने लगती है, लेकिन इस बार फरवरी में तापमान में वृद्धि हो गई है। अधिकतम तापमान 28 डिग्री तक पहुंच गया है। ठंड कम पड़ने से गेहूं की फसल का पूरा विकास नहीं हो पाया है।
पारा चढ़ने से ओस भी कम पड़ रही है। ऐसे में इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। किसान हरीराम, विनोद, लीलाधर, हरनारायण आदि ने बताया कि एक बीघा में लगभग सात से आठ क्विंटल गेहूं होता था। इस बार मौसम में बदलाव होने से चार क्विंटल गेहूं निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
किसानों ने बताई हकीकत
इस बार मौसम ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। फरवरी में ही गर्मी का अहसास होने लगा है। गेहूं के छोटे पौधों में ही बालियां निकलने लगी हैं। इससे पैदावार प्रभावित होगी। खाद-बीज का खर्चा निकलना मुश्किल हो जाएगा।
- चंद्रिका तिवारी, किसान, निवासी खरेला गांव
कृषि वैज्ञानिक फसलों की सिंचाई की सलाह दे रहे हैं, लेकिन नहरों में पानी नहीं आ रहा है। इससे फसल पीली पड़कर सूखने लगी है। उधार रुपये लेकर बुआई की थी। बेहतर उत्पादन नहीं होने से परेशानी होगी।
- संतोष कुशवाहा, किसान,
परथनिया गांव
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30 बीघा में गेहूं की फसल बोई है। फसल पकने लगी है लेकिन दाने सही से नहीं आए हैं। इससे पैदावार कम होने से आशंका है। अर्जुन बांध से निकली नहर में पानी टेल तक न पहुंचने से समस्या और गहरा गई है।
- शिवम सिंह, किसान
बढ़ते तापमान से अगेती फसल को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। लेकिन जिसकी बिजाई 15 दिसंबर के बाद की गई है उस पर अधिक प्रभाव पड़ेगा। मौसम के गर्म होने से पौधों और दानों का सही विकास नहीं हो पा रहा है। इस वजह से फसल जल्दी पक जाती है। इससे पैदावार प्रभावित होती है। फसल को अधिक तापमान से बचाने के लिए किसानों को सिंचाई करनी चाहिए।
-डॉ. एकेएस यादव, उप कृषि निदेशक, महोबा।