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टप्पेबाज ने श्रमिक की जेब से 15 हजार की नगदी उड़ाई

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महोबा। मेहनत-मजदूरी करके रक्षाबंधन पर्व पर दिल्ली से लौट रहे श्रमिक से टप्पेबाजों ने 15 हजार रुपये पार कर दिए। घटना को अंजाम देकर भाग रहे आरोपी को श्रमिक ने पकड़ लिया। राहगीरों ने पिटाई करने के बाद आरोपी को पुलिस को सौंप दिया।
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जनपद हमीरपुर के पहाड़ी बिटारी गांव निवासी सिद्घगोपाल दिल्ली में मजदूरी का काम करता है। रक्षाबंधन का पर्व होने के चलते वह बस से महोबा आया और ई-रिक्शा में बैठकर रोडवेज बस स्टैंड जाने लगा। तभी ई-रिक्शा में बैठे एक युवक की उसकी जेब काट ली और भागने लगा। श्रमिक ने जब नगदी गायब देखी तो रिक्शा रुकवाकर आरोपी का पीछा किया और पकड़ लिया। घटना के दौरान भीड़ एकत्र हो गई। राहगीरों ने टप्पेबाज की पहले तो जमकर पिटाई कर दी और बाद में पुलिस को सौंप दिया। (संवाद)
फोटो 21 एमएएचपी 12 परिचय-रक्तदान करते दीपक शुक्ला
दिव्यांग की रक्तदान कर बचाई जान
जागरूक युवा दीपक ने महोबा से बांदा पहुंच किया रक्तदान
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। रक्त की कमी से किसी की जान न जाए इस संकल्प के साथ पूरे बुंदेलखंड में अभियान चला रहे विंग्स संस्था के अध्यक्ष दीपक शुक्ला ने नेत्रहीन दिव्यांग की रक्तदान कर जान बचाई। दीपक अपने निजी खर्च पर महोबा से बांदा मेडिकल कॉलेज में भर्ती दिव्यांग को रक्त देने पहुंचे।
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बांदा निवासी कमलेश साहू का पुत्र शिवसागर (19) नेत्रहीन है। शिवसागर रोहतक में नेत्रहीन विद्यालय में रहकर कंप्यूटर की शिक्षा ग्रहण कर रहा था। पीलिया बीमारी से ग्रसित होने पर परिजन छात्र को 15 दिन पहले घर ले आए थे। बाद में उसे बांदा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। शिवसागर के शरीर में ढाई यूनिट रक्त शेष होने के चलते उसकी हालत बिगड़ गई। तब डॉक्टरों ने खून की जरूरत बताई। गरीब पिता के ए-पॉजिटिव ग्रुप के खून के लिए इधर-उधर भटकता रहा लेकिन खून नहीं मिला। बांदा के जागरूक युवा अनुज त्रिवेदी ने महोबा में संस्था चला रहे दीपक शुक्ला से संपर्क किया। तब शुक्रवार की शाम दीपक ने बांदा पहुंचकर रक्तदान किया। जिससे दिव्यांग नेत्रहीन की जान बच गई। उनके इस कार्य की लोग सराहना कर रहे हैं।
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