कथा वाचिका विदुषी पद्महस्ता भारती जी ने रासलीला के पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करने के साथ लोगों के संशयात्मक दृष्टिकोण को भी दूर किया। बताया कि शास्त्रों में कहा गया है जिस रस के अनुभव से आनंद की प्राप्ति होती है, वह परमात्मा ही रस है।
कथा वाचिका पद्माहस्ता भारती रविवार को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में डाक बंगला मैदान में श्रीमद् भागवत कथा में बोल रही थी।
उन्होंने भगवान कृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियों की वेदना का हृदय विदारक वर्णन प्रस्तुत किया। कंस वध का उल्लेख करते हुए कहा कि जब-जब भी धरा पर आसुरी शक्तियां हाहाकार मचाती है। तब-तब प्रभु अवतार धारण करते हैं।
बताया कि द्वापर काल में जब कंस के अत्याचारों से धरती त्राहिमाम कर उठी, तब धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण के रूप में अवतरित हुए।
कहा कि गोपियों ने कण- कण में अपने कान्हा का दर्शन किया। कहा कि एक तरफ भोली भाली गोपियां, जिन्हें विद्वानों की भाषा का तनिक भी ज्ञान नहीं था, प्रेम की पराकाष्ठा को छू गई।
भागवत कथा के बीच- बीच में भजन सुनाकर भक्तों को कथावाचिका ने भाव विभोर कर दिया। संगीतमय कथा से माहौल भक्तिमय बना दिया। कथा दौरान समाजसेवी शिकुमार गोस्वामी, महंत विशंभर दास, अश्वनी द्विवेदी, विनोद पुरवार, राहुल दीक्षित, अभिलाषा, ज्योति द्विवेदी, माधुरी शुक्ला आदि मौजूद रहे।