महोबा। भाजपा की पूर्व जिलामंत्री की ओर से जिलाध्यक्ष पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद बुधवार को मामले का पटाक्षेप हो गया। पूर्व जिलामंत्री के बयान से तीन बार मामले में यू-टर्न आया। बाद में आखिरकार दोनों पक्षों में समझौता हो गया। पूर्व जिलामंत्री ने कहा कि मतभेद मिट गए हैं। अब जिलाध्यक्ष से कोई शिकायत नहीं हैं। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष ने पूर्व जिलामंत्री को अपनी छोटी बहन बताया।
एक माह पहले भाजपा की ओर से जारी की गई जिला कार्यकारिणी के बाद से विवाद शुरू हुआ था। सूची में जिला मंत्री के पद पर शामिल महिला नेता ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 26 अप्रैल को पूर्व जिला मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर आरोप लगाया था कि उन्हें जिला उपाध्यक्ष बनाए जाने के एवज में अनैतिक दबाव बनाया गया। साथ ही जिला पंचायत का टिकट देने की बात कही गई। यह मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा।
मामले की जांच के लिए भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष कमलावती सिंह व कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के भाजपा उपाध्यक्ष संत विलास शिवहरे के नेतृत्व में दो सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने महोबा आकर मामले की जांच शुरू की। इसके बाद पूर्व जिला मंत्री ने जांच समिति के सामने समझौता होने की बात कही। कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि मेरा समझौता पार्टी से हुआ है। मैं अभी भी भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई चाहती हूं। बुधवार को एक बार फिर उन्होंने बयान बदला। कहा कि उनका पार्टी और भाजपा जिलाध्यक्ष से समझौता हो गया है। पूर्व जिला मंत्री का कहना है कि हम लोगों के आपसी मतभेद मिट गए हैं। अब उन्हें जिलाध्यक्ष जी से कोई शिकायत नहीं हैं। आरोप के सवाल पर कहा कि वह इसमें कुछ नहीं कहेंगी। उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने पूर्व जिला मंत्री को अपनी छोटी बहन बताया। कहा कि लोगों के भ्रम फैलाने से हमारा मतभेद हुआ था।