जिला पंचायत विभाग की उदासीनता से श्रीनगर कस्बे के लोग नारकीय जीवन जी रहे
हैं। बारिश में जगह जगह कीचड़ और गड्ढायुक्त सड़कों से लोगों का चलना
मुश्किल है। हालत यह है कि इन सड़कों से घर तक जाना पहुंचना टेढ़ी खीर है।
इन सड़कों में आए दिन गिरकर चुटहिल हो रहे हैं।
आसपास के ग्रामीण
अंचलों के लोगों को बाजार जाने के लिए मुसीबत उठानी पड़ती है। जिला पंचायत
और लोकनिर्माण विभाग मरम्मत के नाम पर चुप्पी साधे है।
बिलरही
तिराहे से भैरोगंज मार्ग का अता-पता नहीं है। आठ साल पहले जिला पंचायत ने
इसे बनवाया था। अब यह सड़क गायब है, लोग कीचड़ से भरे कच्चे मार्ग से बाजार
और घरों तक पहुंचते हैं।
इस कीचड़युक्त मार्ग पर राजा मोहन सिंह
का तालाब है। इस ऐतिहासिक तालाब को देखने के लिए लोगों को कीचड़ से होकर
जाना पड़ रहा है। इसी मार्ग पर जूनियर स्कूल है। जवारे और कजली भी इसी
मार्ग होकर निकाली जाती है।
बाजार से बेलाताल रोड को जोड़ने वाली
कस्बे की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। सड़क कहां है और गड्ढे कहां है,
इसका पता नहीं लगता है।
एक दशक पहले इस सड़क को लोक निर्माण विभाग
ने बनवाया था, लेकिन कभी भी इस रोड की जिला पंचायत ने मरम्मत नहीं कराई।
अब यह सड़क तबाह हो गई है। यह मार्ग कीचड़ से पटा है। इसी मार्ग से लोगों
को साप्ताहिक हाट के लिए आना जाना पड़ता है।
बस स्टैंड से मुख्य बाजार जाने वाली एक किमी लंबी सड़क में भी एक एक फिट गहरे गड्ढे हैं। इस रोड पर नैपकिन और मिलन केंद्र है।
नैपकिन
केंद्र में आए दिन जिलाधिकारी के अलावा अन्य अधिकारी पहुंचते हैं, लेकिन
किसी भी अधिकारी ने इसे बनवाने की पहल तक नहीं की है, जिससे सड़क पूरी तरह
खत्म हो गई है। अब नाले नालियों का पानी सड़क में भर जाता है।