सजा ऐतिहासिक गोवर्द्धन्नाथ जू मंदिर
महोबा/चरखारी। झीलों के शहर के नाम से प्रसिद्ध कस्बा चरखारी में इस समय चारों ओर उल्लास का माहौल है। मौका है 142वें ऐतिहासिक गोवर्द्धन्नाथ जू महाराज मेले का। मेले का इतिहास चरखारी के रियासतकाल से जुड़ा है।
गौरवशाली अतीत और अलौकिक वैभव से परिपूर्ण कस्बा चरखारी में देवोत्थान एकादशी पर गोवर्द्धन्नाथ जू मेले का नजारा वृंदावनमय होगा। यहां एकादशी पर बुंदेलखंड के सात जिलोंं के अलावा मध्यप्रदेश के विभिन्न जनपदों से कार्तिक स्नान करने वाली महिलाओं की भीड़ जुटेगी।
एक माह तक चलने वाले मेले की शुरूआत 22 अक्तूबर से हो चुकी है। रियासत के महाराज भगवान श्रीकृष्ण के उपासक थे। कार्तिक मास में एक माह तक चलने वाले गोवर्द्धन्नाथ जू महाराज मेले का शुभारंभ राज्य के तत्कालीन महाराजा सर मलखान सिंह जूदेव ने विक्रम संवत 1940 कार्तिक शुक्ल मास में सन् 1883 ईस्वी में कराया था। तब से यह मेला लगातार आयोजित होता आ रहा है।
यह मेला भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित हैं, इसमें गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठ उंगली पर धारण किया जाना विशेष रूप से दर्शनीय हैं।
108 देव मंदिरों के मध्य गोवर्द्धन्नाथ जू महाराज की अनुपम झांकी व मंदिरों की दुर्लभ और निराली छटा अत्यंत मनोहारी हैं। चरखारी को मिनी वृंदावन भी कहा जाता है। यह मेला देवोत्थान एकादशी से विस्तृत रूप लेगा। 22 नवंबर तक चलने वाले मेले में विभिन्न जनपदों से आए दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाना शुरू कर दी हैं।