फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में पानी को लेकर मची हाय तौबा

Fri, 25 Sep 2015 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
विज्ञापन
विज्ञापन
महोबा। जिले में पानी के लिए हाय-तौबा मची है। सप्ताह में मात्र दो दिन पानी की आपूर्ति होने से हैंडपंपों और कुओं में भारी भीड़ जुट रही है। शहर में त्योहार को भी पानी की आपूर्ति न होने से मुस्लिम समुदाय के लोगों में खासा गुस्सा दिखाई दिया।
विज्ञापन

मालूम हो कि पिछले कई सालों से सूखे के चलते बांधों, सरोवरों और कुओं के सूख जाने से जिले के चारों ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। उर्मिल बांध में थोड़ा बहुत पानी होने के कारण शहर में व मुश्किल 15 से 20 मिनट पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे ऊंचाई के इलाकों में पानी न पहुंच पाने से लोगों को दिक्कत हो रही है। जिससे मजबूरन लोग हैंडपंपों और कुओं से पानी भरकर प्यास बुझा रहे हैं। शहर में चौबीस घंटे में मात्र एक टाइम पानी की सप्लाई की जा रही है। वहीं ग्रामीण अंचलों में पानी की विकराल समस्या बनी हुई है। रिवई, चरखारी, खरेला सहित कई गांव कस्बों में सप्ताह में मात्र दो दिन ही पानी की आपूर्ति होती है। हालांकि शुक्रवार को त्योहार के चलते चरखारी वासियों को पानी मिल गया। पनवाड़ी, बेलाताल और कुलपहाड़ में सबसे ज्यादा पानी की समस्या बनी हुई है। यहां पर भी दो-दो दिन तक पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे पानी को लेकर हाय तौबा मची हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं लंबी दूरी तय करके पानी लाने का मजबूर हैं।

पानी संकट के चलते आई कुओं की याद
जिले में हर साल सैकड़ों की संख्या में गांव, गली में हैंडपंप लगने से लोग कुओं को भूल गए, इतना ही नहीं पालिका प्रशासन द्वारा भी कुओं की सफाई की सालों से सुध नहीं ली गई, जिससे के चलते कुए उपेक्षित पड़े हैं। तमाम कुए देखरेख के अभाव में जमीदोज हो गए हैं। कुओं का पानी इस्तेमाल न होने से उनकी सिरे खत्म हो गई हैं। अब हैंडपंपों का जलस्तर नीचे खिसकने, तालाबों, बांधों के सूखने से अब कुओं की याद आ रही है। तमाम ग्रामीण ने स्वयं कुओं की सफाई कर पानी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें