फोटो 27 एमएएचपी 15 परिचय-सम्मेलन में रचना पेश करते कवि। संवाद
चरखारी (महोबा)। वर्ष 2025 की विदाई के मौके पर कस्बा चरखारी में आयोजित कवि सम्मेलन व मुशायरा में कवियों और शायरों ने रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जाकिर हुसैन वफा ने गजल प्यार का रिश्ता टूट चुका है, दर्द का रिश्ता आज भी है... पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राहुल मिश्रा, डॉ. सनत राजपूत व महिपाल साहू ने दीप जलाकर किया। डॉ. इफ्तेखार खान ने नात-ए-पाक पेश की। इसके बाद शायर हफीज कमाल ने जिसकाे चाहा था वो मिला ही नहीं अब किसी राह से वास्ता ही नहीं... पेश कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। निहाल खां की हास्य व्यंग की रचना मुझको दुनिया से गजर क्या, मेरी दुनिया तुम हो... पेश की। कवि प्रदीप शर्मा की रचनाओं को जमकर वाहवाही मिली। इमरान देहलवी की गजल रोशनी की नुमाईश जो करते है अपने दयार में, वही बेचते हैं अंधेरा सरे बाजार में... पेश की। कवि राहुल बड़ौनिया की रचना हर एक से तीन, तीन काम न सही, तीन से मिलकर कोई काम तो हो... को खूब सराहा गया। फहीम रजा खैरवी ने कद बड़ा नहीं होता है ऐड़ियां उठाने से, सर बुलंदी मिलती है अपना सिर झुकाने से... गजल पेश की। इस मौके पर कवि प्रदीप दिहुलिया, आफताब कौशर, सलीम खां, नूर चरखारवी, आजम कुरैशी, हफिज आबिद, जमील खां ने रचनाएं पेश की।