महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर इस बार मानसून रूठा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस वर्ष माह जून में सबसे कम बारिश हुई है। इससे बुंदेली धरा पर एक बार फिर सूखे का साया मंडरा रहा है। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए लोग बारिश की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन मौसम है कि मान मनौव्वल के बाद भी इस ओर रुख नहीं कर रहा। लोग भीषण गर्मी की ताप से त्रस्त हैं।
मानसून सत्र का समय 15 जून से शुरू होता है जबकि महोबा में पिछले कुछ वर्षों से 18 जून तक बारिश का सिलसिला शुरू होता रहा है लेकिन इस बार बारिश नहीं हुई है। हालात यह हैं कि मानसून सत्र में जून माह के 14 दिन में अभी तक सिर्फ 20 एमएम बारिश हुई है जबकि पिछले वर्ष जून माह में 222 एमएम बारिश हुई थी।
इस वर्ष बारिश न होने से उमस भरी गर्मी का दौर जारी है। हालांकि, पिछले तीन दिन से आसमान में बादलों की आवाजाही हो रही है लेकिन कभी तेज हवाएं चलने तो कभी बूंदा-बांदी के बाद आसमान साफ हो जाता है। इससे बुंदेली धरा बारिश के लिए तरस गई है। इसका प्रकोप उमस भरी गर्मी के रूप में देखने को मिल रहा है।
जून में कम बारिश से फसलों पर पड़ेगा असर
कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल के वैज्ञानिक रजनीश मिश्रा का कहना है कि माह जून में होने वाली बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। कम बारिश होने से लौकी, करेला, तोरई, भिंडी और ग्वार फली जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ अरहर, मक्का व बाजरा जैसी फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पांच साल में जून माह में बारिश
वर्ष-बारिश
2022-028 एमएम
2023-233 एमएम
2024-022 एमएम
2025-222 एमएम
2026-020 एमएम
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प्रत्येक बांध में तीन-तीन जेई तैनात
मानसून सत्र को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बांधों की चौकसी बढ़ा दी है। सिंचाई प्रखंड महोबा की ओर से बांधों में बाढ़ नियंत्रण चौकियां स्थापित की गई हैं। यूपी-एमपी की सीमा पर स्थित उर्मिल बांध, तहसील चरखारी में स्थित अर्जुन बांध और चंद्रावल बांध में तीन-तीन अवर अभियंताओं को तैनात किया गया है। यदि बारिश होती है तो बांधों का जलस्तर नाप कर प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट दो-दो घंटे के अंतराल में भेजी जा सके। उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मोतीलाल का कहना है कि अभी बांधों में पर्याप्त पानी है। मानसून सत्र के दौरान यदि 50 फीसदी भी बारिश होती है तो बांध भर जाएंगे। पेयजल आपूर्ति में दिक्कत नहीं होगी।