रोटी की तलाश में परदेश जाने की मजबूरी सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, पक्षी भी भोजन की तलाश में दूर देश का सफर करते हैं। दूसरे देशों का सफर करने वाले ऐसे पक्षियों को प्रवासी पक्षी कहते हैं। ठंड की दस्तक के साथ ही बुंदेलखंड के विख्यात विजय सागर पक्षी विहार और बांधों में परदेसी परिंदों का आना शुरू हो गया है। मेहमान पक्षियों के लिए ठंड में विजय सागर और उर्मिल बांध सबसे मुफीद जगह बन गई है। हजारों किमी. से आए देशी विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से झीलें गूंज रही हैं।
सुदूर ठंडे देशों में अधिक सर्दी बढ़ने से परदेसी परिंदों ने बुंदेलखंड की तरफ रुख कर लिया है। आसमान पर फिलहाल एक से एक आकर्षक प्रवासी पक्षी उड़ान भरते दिखाई देने लगे हैं। प्रवासी पक्षियों के आने के बाद उनका शिकार होने के कारण 25 फीसदी मेहमान पक्षी वतन नहीं लौट पाते हैं। साइबेरिया इस समय बर्फ से ढक जाता है, कड़ाके की ठंड वहां के पक्षियों के बर्दाश्त के बाहर होने के कारण वह ठंड से बचने के लिए भारत की तरफ रुख करते हैं। यहां की ठंड उनके जीवन के लिए मुफीद होती है, यहां रहकर यह बड़े और घने पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं। तापमान बढ़ने के साथ मार्च के शुरुआत में ही यह परिंदे अपने वतन के लिए लौट जाते हैं। ठंडे देशों ने आने वाले प्रवासी पक्षियों ने बाबलिक, आर्कटिक, कुर्मी, अब्राबील, सुनहरी बटान, आर्कटिक लुटान, तिहरी जाति के पक्षी प्रमुख हैं। आर्कटिक कुरकी कबूतर के समान एक छोटी चिड़िया है। लालसर और कालासर 8000 किमी. की दूरी तय करके यहां आती हैं।
ये परिंदे भरते हैं बुंदेलखंड की उड़ान
प्रवासी पक्षियों में दुर्लभ साइबीरिया सारस दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी है। सर्दियों में भारत आने वाले पक्षियों में साईबेरियाई क्रेन, छोटी बतकें, पीली और सफेद वैंग्टेल, कामन, ग्रीनशैंक, नार्दन पिन्टेल, रोजी, पेलिकन, गेटवेल, बुड, स्नैडपाइपर और ब्लूथ्राट सहित पक्षियों की दर्जनों प्रजातियां प्रमुख हैं।
परिंदे कम भरते हैं उड़ान
देश के दूसरे तटीय इलाकों में नदी, झीलों के आसपास इन दिनों पक्षियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। हजारों की संख्या में आने वाले यह पक्षी हमे उड़ते हुए क्यों नहीं दिखाई देते हैं। बात यह है कि ज्यादातर पक्षी रात के समय ही प्रवासी उड़ान भरते हैं। उनके बड़े बड़े झुंड की ओर हमारा ध्यान नहीं जा पाता है।
तालाबों में पानी न होने से बांध बने आसरा
दो साल से बारिश न होने के कारण जिले की ज्यादातर झीलें और तालाबों के सूख जाने से सुदूर देशों से आए परदेसी परिंदे इधर से उधर भटक रहे हैं। बाद में इन परिंदों ने बांधों का आसरा लिया है, वहीं चंदेल कालीन झील विजय सागर भी पक्षियों के लिए खासी मुफीद साबित हो रही है। जबकि ज्यादातर तालाब और झीलों में धूल उड़ रही है।