फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनदेखी के चलते वीरान हुआ विजय सागर पक्षी विहार

Fri, 21 Aug 2015 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
विज्ञापन
विज्ञापन
 कभी शहर की शान विजय सागर पक्षी विहार अनदेखी के चलते वीरान होता जा रहा है। विजय सागर पक्षी विहार में न तो अब पशु पक्षी नजर आते है और न ही आंख को सुकून देने वाले रंगबिरंगे फूलों की क्यारियां दिखाई देती है। वहीं बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले भी टूट चुके है। वहीं सागर के तट पर बना आल्हा ऊदल किला भी जमीदोज हो चुका है। सुंदरझील की सफाई न होने से झील जलकुंभी से पटी पड़ी है। जिसके चलते यहां आने वाले हजारों सैलानी यहां से किनारा काटने लगे है।
विज्ञापन

एक दशक पहले तक विजय सागर पक्षी विहार में चारों तरफ हरियाली दिखाई देती थी। चारो तरफ हरियाली और रंगबिरंगे फूलों की क्यारियों के बीच बैठकर लोग अपना वक्त गुजारते थे। पक्षी विहार के चारों ओर बनी तारबाड़ी के अंदर रहने वाली हिरन, बारहसिंघा आदि जानवरों को की देखभाल का जिम्मा वन विभाग का होता था। यहां पर पशु पक्षियाें को देखने के लिए पूरे साल हजारों की संख्या में सैलानी टिकट लेकर आते थे। जिले के साथ ही आस पास के जिलों के लोग भी गर्मी के दिनाें और छुट्टियों में परिवार के साथ मौज मस्ती कर दिन गुजारते थे। सैलानियों की संख्या को देखते हुए यहां एक कैंटीन का संचालन किया गया।
 जहां फुर्सत के क्षणों में लोग नास्ता खाना खाते थे। पक्षी विहार में बोट और स्टीमर का लुत्फ उठाते थे वहीं बच्चे मैदान में लेग झूलों में झूलकर अपना मनोरंजन करते थे। वन विभाग की लगातार अनदेखी के चलते दिन प्रतिदिन वीरान होता जा रहा है। पक्षी विहार की हालत यह है कि न तो अब वहां मनमोंहने वाले पक्षी है और ही खाने पीने के लिए कैंटीन, पक्षी विहार में महज अब बंदरों को झुंड नजर आता है। जो एक एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर उछलते रहते है। कभी झील में चलते वाले वोट व स्टीमर जलकुुंभी होने के कारण कूड़े में पड़े हुए है। वहीं  पेड़ों की डिजाइन करके बनाए गए डायनासोर और लगाए गए झूले भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे है।
विज्ञापन


टिकट बिक्री में आई कमी
एक दशक पहले विजय सागर पक्षी बिहार में लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए वन विभाग द्वारा टिकट सिस्टम कर दिया गया, जिसकी कीमत शुरू में प्रति टिकट दो रुपये रखी गई थी, जो धीरे धीरे पांच और फिर सात रुपये में तब्दील हो गई थी।  सबसे ज्यादा रविवार और मंगलवार को टिकटों की बिक्री होती थी, लेकिन पक्षी बिहार का अस्तित्व खत्म होने से यहां पर लोगों की आवाजाही कम हो गई जिससे टिकटों की बिक्री भी आधे से कम हो गई है।

खत्म होता जा रहा झील का अस्तित्व
वन विभाग द्वारा विजय सागर पक्षी विहार नर्सरी में पेड़ पौधे लगाए जाते थे, जिससे विजय सागर का बड़ा भूभाग पेड़ पौधों से हरा भरा नजर आता था। चारों तरफ हरियाली और विजय सागर की सुंदर झील विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करती थी, लेकिन अब न यहां पर पौधों को तैयार किया जाता और न सुंदर झील की सफाई कराई जाती है। पर्यटकों के घूमने के लिए मंगाई गई वोट और स्टीमर भी बेकार पड़ी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें