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मकान ढहने के साथ ही खत्म हो गई मुंशी जी की निशानी

Sun, 18 Dec 2016 09:52 PM IST
अमर उजाला/महोबा
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गिरने के बाद सिर्फ रह गई ये दीवार। - फोटो : अमर उजाला
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शहर के मोहल्ला छजमनपुरा में मुख्य बाजार में मुशी प्रेमचंद का किराए का मकान ढहने के साथ उनकी यादें भी खत्म हो गई। इसी ऐतिहासिक इमारत में रहकर मुंशी प्रेमचंद ने कई उपन्यास और कहानियां भी लिखी हैं।
वर्ष 1909 से 1916 तक बेसिक शिक्षा विभाग में एसडीआई के पद पर रहे मुंशी प्रेमचंद स्कूलों का निरीक्षण बैलगाड़ी से करते थे। रात में गांव में ही विश्राम करते थे और अगले दिन आसपास के गांवों के स्कूलों का निरीक्षण करते थे। महोबा के मोहल्ला छजमनपुरा में किराए पर करीब सात साल तक रहे हिंदी जगत के महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के किराए के मकान की इमारत शनिवार को ढहने के साथ ही उनकी यादें भी इमारत ढहने के साथ ही खत्म होेने लगी हैं।
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छजमनपुरा में किराए के मकान में रहकर ही मुंशी प्रेमचंद ने आत्माराम और मंत्र जैसी मशहूर कहानियां लिखी हैं। इसके अलावा शोज ए वतन पुस्तक नवाब राय के नाम से लिखी थी। मशहूर साहित्यकार की वर्षो से जर्जर इमारत को संरक्षित करने की प्रशासन ने भी कोई पहल नहीं की है। जिससे उनकी इमारत ढहने के साथ आने वाले समय में लोग उनकी यादें भी भूल जाएंगे। लोग इस इमारत को मुंशी प्रेमचंद की इमारत के नाम से जानते थे। महोबा में लिखी गई उपन्यास और कहानियों के काफी पसिद्ध होने के साथ ही महोबा का भी नाम रोशन हुआ है।
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