महोबा। जनपद में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की बंदी होने से छोटे दुकानदारों ने अपने मुनाफे में कटौती कर व्यापार को संभाल रखा है। दाम बढ़ाने पर दुकानदारी चौपट होने का डर उन्हें सताए जा रहा है, इसलिए वह अपना ही पेट काटकर किसी तरह से परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर है जबकि कुछ दुकानदार लकड़ी-कोयला का सहारा लेकर काम चला रहे हैं।
वर्तमान में जिले में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति बंद चल रही है जबकि रसोई गैस सिलिंडरों को प्राप्त करने के लिए लोगों को जटिल हो चुकी ऑनलाइन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इन सबके बीच ऐसे दुकानदार जो सड़क किनारे, चाट, फास्ट फूड का ठेला लगाते हैं और छोटे व बड़े व्यावसायिक सिलिंडरों का प्रयोग कर रहे है। वह पहले जैसा लाभ नहीं कमा पा रहे हैं। व्यावसायिक सिलिंडर न मिलने पर वह किसी तरह से जुगाड़ करके महंगे दाम पर गैस रिफिलिंग कराने को मजबूर हैं। पहले जहां वह 100 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गैस भरा लेते थे, अब उन्हें इसके लिए 200-250 रुपये प्रति किलोग्राम देने पड़ रहे हैं। व्यापार बचाने के लिए वह इस रेट पर रिफिलिंग कराकर अपना परिवार संभालने को मजबूर है। अब गौर करने वाली बात यह है कि महंगे दाम पर गैस तो उन्हें जुगाड़ से मिल जा रही है लेकिन वह अपने दुकान पर आने वाले ग्राहकों के चाट व मोमोज का रेट नहीं बढ़ा पा रहे हैं। ऐसे में जो मुनाफा उन्हें पहले हो रहा था, अब उसमें कटौती शुरू हो गई है।
चरखारी बाईपास सड़क पर चाट का ठेला लगाने वाले संतोष व रवि कहते हैं कि दाम बढ़ाने पर ग्राहकों के वापस जाने का खतरा है और ऐसे में व्यापार चौपट हो सकता है। इसलिए अपना मुनाफा कम करके किसी तरह से काम चला रहे हैं। उधर, जिला पूर्ति अधिकारी राजीव तिवारी ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति के लिए प्रशासन प्रयासरत है। इससे जल्द से जल्द सिलिंडरों की आपूर्ति शुरू हो सके। रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति निरंतर चल रही है। नियमानुसार सिलिंडर प्राप्त करें।
एक बार में अभी भी नहीं हो पा रही बुकिंग
महोबा। रसोई गैस के लिए एजेंसी जाने वाले उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया से अभी भी जूझना पड़ रहा है। उपभोक्ता पहले की तरह एक बार में अभी भी गैस बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। पहले तो उनका नंबर नहीं लगता है और अगर गैस बुक हो गई तो बुकिंग नंबर व ओटीपी नहीं आ पाता है। ऐसे में वह एजेंसी का चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं। एजेंसियों में सुबह से लेकर दोपहर तक इस समय उपभोक्ताओं की भीड़ रहती है।
मुनाफे में कटौती करना मजबूरी
महोबा। सदर तहसील के बाहर समोसे, ब्रेड पकौड़े का ठेला लगाने वाले जुगल किशोर ने बताया कि कॉमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। जुगाड़ के जरिए गैस मिल पा रही है। जिसके अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। मुनाफा कम हो गया है। दाम बढ़ाने पर व्यापार खराब होने की संभावना है। दाम बढ़ाए तो ग्राहक वापस होने लगे थे। अब पुराने दाम पर ही समोसे दे रहे हैं।
तीन दिन से एजेंसी के लगा रहे चक्कर
शहर के भटीपुरा निवासी अशोक ने बताया कि वह तीन दिन से एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन बुकिंग के बाद भी उन्हें गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। मोबाइल में बुकिंग नंबर व ओटीपी ही नहीं आ रही है। इससे यह दिक्कत हो रही है। फोन लगाने पर चार घंटे के अंदर मैसेज प्राप्त होने का संदेश आता है। चार घंटे के बाद फिर से यही मैसेज आता है, क्या करें, समझ में नहीं आ रहा है।