महोबा। 2011 के बाद खनन पट्टों की बाट जोह रही मंडी में एकाएक पहाड़ों की नीलामी में खनिज के बेस रेट से पांच गुना तक बोली आने और स्टांप ड्यूटी सवा तीन सौ गुना बढ़ जाने से जहां कारोबारी परेशान हैं तो वहीं खनिज विभाग राजस्व में अभूतपूर्व वृद्धि देख गदगद है। वहीं अभी तक 300 से अधिक खनन पट्टों की नीलामी प्रक्रिया शुरू होना शेष है। जिससे विभाग को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने के आसार बढ़ गए हैं।
जिले में अभी तक 160 रुपया प्रति घनमीटर की दर से गिट्टी की निकासी हो रही थी। शासन ने दस साल तक होने वाले खनन पट्टों की पालिसी बदलकर नई खनन नीति 2017 लागू कर ई नीलामी प्रक्रिया से 20 साल के लिए खनन पट्टे देना शुरू कर दिए। जिले में आमंत्रित की गई आनलाइन निविदा में रायल्टी दरें 702 रुपये तक पहुंच गई है।
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साथ ही पूर्व में बघवा पहाड़ के पट्टे जो 15 हजार रुपये प्रति एकड़ से बढ़कर 50 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गई है। नए शासनादेश के मुताबिक सवा तीन सौ गुना वृद्धि के साथ स्टांप ड्यूटी देय होगी। ऐसी स्थिति में महोबा जिले के खनन क्षेत्रों में भारी मूल्य वृद्धि के चलते कैसे पत्थर कारोबार चलेगा हर आदमी परेशान है। वहीं क्रेशर यूनियन के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह का इस मामले में कहना कि जो भी दरें सरकार निर्धारित कर रही है। उससे सामान्य नागरिक का भवन निर्माण के लिए गिट्टी पत्थर खरीदना सपना बन जाएगा।
जिले के पत्थर कारोबारियों ने मध्य प्रदेश में डाला डेरा
जिले में पहाड़ पट्टों की ई नीलामी सिस्टम शुरू होने से कई गुना रायल्टी दरें और स्टांप ड्यूटी बढ़ जाने से जिले के पत्थर कारोबारियों ने यहां से नाता तोड़कर सरहद से सटे मध्य प्रदेश के पहाड़ों के पट्टे करा लिए हैं और जिले में मध्य पद्रेश का पत्थर बेच रहे हैं। तमाम दिग्गज पहाड़ कारोबारियों ने यहां पर कई गुना स्टांप एवं रायल्टी की दरें बढ़ने से कारोबारियों ने मध्य प्रदेश में डेरा जमा लिया है। जिससे जिले का पत्थर कारोबार प्रभावित हो रहा है। ई रॉयल्टी के जरिए पहाड़ों के पट्टों ने महंगाई के मामले में एक नया इतिहास रचा है।