फोटो 24 एमएएचपी 16 परिचय-कलक्ट्रेट में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे इलाहीपुरवा ग्योड़ी के मजरा सिद्धनडेरा के स्कूली बच्चे। संवाद
फोटो 24 एमएएचपी 17 परिचय-एसडीएम शिवध्यान पांडेय को शिकायती पत्र देकर समस्या बताते स्कूली बच्चे व अभिभावक। संवाद
फोटो 24 एमएएचपी 18 परिचय-शिकायत के बाद सिद्धनडेरा के मार्गों का निरीक्षण कर अभिभावकों से जानकारी लेते बीएसए राहुल मिश्रा। संवाद
फोटो 24 एमएएचपी 19 परिचय-सिद्धनडेरा के इस दलदल युक्त मार्ग से निकलते हैं बच्चे और ग्रामीण। संवाद
फोटो 24 एमएएचपी 20 परिचय-कलक्ट्रेट शिकायत करने के लिए गांव के दलदल युक्त मार्ग से आते बच्चे। संवाद
- ब्लॉक कबरई के मजरा सिद्धनडेरा, दिसरापुर और बिलवई के 100 से अधिक बच्चे व अभिभावक पहुंचे
-एडीएम और एसडीएम को बताई समस्या, बीएसए ने बच्चों को गोद में उठाकर ली जानकारी, गांव पहुंच देखी सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बदहाल सड़कों व जलभराव से परेशान छात्र-छात्राएं अब बेहिचक आगे आ रहे हैं। सोमवार को तीन गांवों के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। एडीएम व एसडीएम को शिकायती पत्र देकर सड़क बनवाने की मांग की। इस दौरान बीएसए ने बच्चों को गोद में उठाकर उनसे समस्या पूछी। साथ ही गांव पहुंच सड़कों की हकीकत देखते हुए शीघ्र दुरुस्त कराए जाने का भरोसा दिया। तब छात्र-छात्राएं शांत हुए।
ब्लॉक कबरई के इलाहीपुरवा ग्योड़ी के मजरा सिद्धनडेरा निवासी छात्र सुनील, शीला, कमल, उमादेवी, सुशीला, संजय, संतोष, ज्ञानवती और ग्रामीण राकेश, रामप्रताप आदि ने कलक्ट्रेट पहुंच नारेबाजी करते हुए खस्ताहाल मार्ग का निर्माण कराने की मांग की। बाद में एडीएम नमामि गंगे सूर्यकांत त्रिपाठी व एसडीएम शिवध्यान पांडेय को शिकायती पत्र देकर बताया कि उनका मजरा ग्योड़ी मुख्य मार्ग से 500 मीटर अंदर है। यहां से 30 से अधिक बच्चे परिषदीय विद्यालयों के साथ इंटर कॉलेजों में पढ़ने के लिए कबरई आते-जाते हैं। आने-जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है।
चार मीटर चौड़ी पगडंडी में बारिश में कीचड़ और दलदल के साथ जलभराव हो जाता है। इससे वह आए दिन फिसलकर गिर जाते हैं। कपड़े, जूते व बैग खराब हो जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क इतनी खराब है कि बीमार होने पर बुजुर्गों व प्रसूताओं को मुख्य मार्ग तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
इसी तरह दिसरापुर और बिलवई गांव निवासी हरीशंकर, खेमचंद्र, ओमप्रकाश, अजय, मनोज, सलमान आदि अभिभावकों व बच्चों ने अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि उनके गांव में ट्रेन पटरी तक जाने वाले मुख्य मार्ग पर कोई सड़क और खड़ंजा नहीं है। बारिश के मौसम में सड़क पर पानी भरा है। सड़क दलदल में तब्दील होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। आने-जाने के दौरान अक्सर बच्चे चोटिल हो जाते हैं। इससे उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही है।
किसी के बीमार होने पर 108 व 102 नंबर एंबुलेंस भी गांव के अंदर नहीं आ पाती है। बीमार लोगों को चारपाई पर गांव से बाहर तक ले जाना पड़ता है। उन्होंने शीघ्र सड़क का निर्माण कराए जाने की मांग की। ताकि, बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और आवागमन बेहतर हो सके। एसडीएम ने ग्रामीणों व बच्चों को आश्वासन दिया कि मौके पर टीमें भेजकर सर्वे कराया जाएगा। जो सड़कें खराब हैं, उन्हें शीघ्र दुरुस्त कराया जाएगा। इससे पहले भी रैपुराकलां गांव के बच्चों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर हाईवे पर जाम लगाया था। जाम लगाए बच्चों से बदसलूकी करने पर शहर कोतवाल समेत चार पुलिसकर्मी लाइनहाजिर हुए थे।
बच्चों को गोद में उठाकर पूछी समस्या, फिर स्वयं गांव गए बीएसए
फोटो 24 एमएएचपी 23 परिचय-बच्चे को गोद में उठाकर गांव के बारे में जानकारी लेते बीएसए। संवाद
महोबा। कलक्ट्रेट पहुंचे सिद्धनडेरा के बच्चों से बीएसए राहुल मिश्रा ने बड़ी शालीनता से बात की। उन्होंने बच्चों को गोद में उठाकर समस्या पूछी। छात्र अनिल ने बताया कि गांव के रास्ते कीचड़ युक्त हैं। स्कूल के आसपास के रास्ते में कम पानी है। इस पर बीएसए ने बच्चों के साथ मौके पर गांव चलने की बात कही। कुछ देर बाद बीएसए सिद्धनडेरा पहुंचे और पूरे गांव के मार्गों का निरीक्षण कर अभिभावकों को शीघ्र सड़क चलाने का भरोसा दिया। बीएसए ने बताया कि विद्यालय के आसपास का रास्ता खराब नहीं है। मुख्य मार्ग से मजरा तक बारिश के मौसम में कुछ सड़क दलदल युक्त है। गांव जाने वाला मार्ग कच्चा होने से कीचड़ मिला। ग्रामीणों को एक-दो दिन के अंदर मार्ग को आवागमन युक्त बनाने का भरोसा दिया गया है। साथ ही सड़क निर्माण के लिए डीएम गजल भारद्वाज को पूरा मामला बताकर प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने बताई समस्या
फोटो 24 एमएएचपी 21 परिचय-जुगला। संवाद
सिद्धनडेरा निवासी ग्रामीण जुगला का कहना है कि सड़क कच्ची है। बारिश होने पर जलभराव व दलदल हो जाता है। इससे न तो बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीणों को भी खेत और अन्य जरूरी काम से आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार सड़क निर्माण की मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।
फोटो 24 एमएएचपी 22 परिचय-लल्लू। संवाद
ग्रामीण लल्लू कहते हैं कि सिद्धनडेरा के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। कई बार उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके है लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। तब यहां के बच्चे सड़क की मांग को लेकर आगे आए और अधिकारियों को समस्या बताई।